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क्यों करते है इस छत्तीसगढ़ के गाँव के आदिवासी जैविक खाद का उपयोग

लेखिका- वर्षा पुलस्त


आज कल जैविक खाद की बहुत चर्चा हो रही है, क्यूँकि उसके फ़ायदे लोगों को धीरे- धीरे समझ में आ रहे है। छत्तीसगढ़ के इस गांव में कुछ ऐसे आदिवासी रहते हैं, जो गोबर से जैविक खाद बनाते हैं, जो फसलों के लिए लाभदायक होता है।


ग्राम कापु बहरा के आदिवासी अपने फसलों को बचाने के लिए रासायनिक दवाई का उपयोग नहीं करते है। सुकुंवर ज़ी, जो गाँव में एक किसान है, उन्होंने बताया कि अगर किसी फसल मैं कीड़ा लग जाता है जिसे फसल बड़ा नहीं हो पाता, या उस पर फल नहीं लगते, तो रासायनिक दवा का प्रयोग न करके वह खुद अपने हाथों से गोबर का जैविक खाद बनाते हैं। इसका उपयोग फिर फसलों में करते हैं। गोबर का खाद बनाने के लिए जिन चीजों की जरूरत होती है, यह गांव में ही मिल जाती है।

कैसे बनाते है जैविक खाद?


जैविक खाद बनाने के लिए गोबर सबसे महत्वपूर्ण होता है गोबर। इसके साथ गुड, बेसन और गोमूत्र की जरूरत होती है। 1 किलो गोबर, 1.5 लीटर गोमूत्र, 1 किलो बेसन और 1 किलो गुड़ को मिलाकर जैविक खाद बनाया जाता है। सबसे पहले 1 किलो गोबर को अच्छी तरह फेंटते हैं, गोबर में गौ मूत्र मिलाते हैं। बेसन और गुड को एक साथ अच्छे तरीके से फेटा जाता है, जिससे गोबर चिकना हो जाए। गोबर को फेंटने के बाद उसकी गोली बनाई जाती है।


फिर गोबर के गोली को 5 दिन तक धूप में सुखाया जाता है। गोबर के सूखने के बाद उसे कूट लेते हैं या पीस लेते हैं, जिससे गोबर का चूर्ण बन जाए। गोबर के चूर्ण का उपयोग फसलों के लिए किया जाता है।

कैसे इस्तेमाल होता है यह जैविक खाद?


सबसे पहले जिस पौधे में बीमारी लगी है या कीड़ा लगा है, उस पौधे की जड़ के किनारे की हल्के से खुदाई कर लेते हैं और इस गोबर के चूर्ण को पौधे के चारों ओर या पौधे के जड़ों में डाल दिया जाता है। इसका कारण? पौधों में बीमारी जड़ों से ही शुरू होती है और गोबर के चूर्ण को पौधों के जड़ों में डालने से पौधों मे लगी बीमारी खत्म हो जाती है।


इस चूर्ण का उपयोग पौधों के पोषण के लिए भी किया जाता है। इससे पौधे स्वस्थ तरीक़े से बड़े होते हैं और फसलों में डालने से फसल भी अच्छी होती है। यह जैविक खाद पौधों को जड़ों से मज़बूत करता है।

जैविक खाद के फ़ायदे ही फ़ायदे है। आपको क्या लगता है- क्या सभी खेतों में जैविक खाद का उपयोग होना चाहिए? क्या आपका खाना जैविक खेतों में उगता है?


लेखिका के बारे में- वर्षा पुलस्त छत्तीसगढ़ में रहती हैं। वह स्टूडेंट हैं जिन्हें पेड़-पौधों की जानकारी रखना और उनके बारे में सीखना पसंद है। उन्हें पढ़ाई करने में मज़ा आता है।


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

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