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कैसे लाख की खेती के ज़रिये सुधर रही है छत्तीसगढ़ के किसानों की आर्थिक स्थिति

छत्तीसगढ़ नाना प्रकार के वन संपदा से भरपूर है। हमारे देश के ग्रामीण अंचल में वृहत रूप से वन परिक्षेत्र हैं। इन वनों में अनेक प्रकार के वन औषधि, फर्नीचर, इमारती लकड़ी तथा बहुमूल्य वनोपज का लाभ मिलता है।


बहुमूल्य वनोपज जैसे- लकड़ी, गोंद और वन औषधि के बारे में तो आपने सुना ही होगा लेकिन मैं आपको लाख की खेती के बारे में बताने जा रहा हूं, जिसके बारे में शायद कम ही लोग जानते हैं।


जैसा कि गणित का लाख बहुत ज़्यादा संख्या को अनुमानित करता है, उसी प्रकार ये वनोपज लाख भी बहुत कीमती होता है। अनेक वनोपज में लाख का बहुत बहुमूल्य स्थान है।


ये वनों के पेड़ तथा ग्रामीण क्षेत्र के खेत-खलिहानों के बड़े-छोटे वृक्षों में पाया जाता है। इसका बीज नहीं होता है। समय आने पर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर स्थानांतरित किया जाता है।


लाख एक प्रकार का कीड़ा होता है, जो पेड़ की छाल को खाकर लाख में बदल देता है। कीड़े द्वारा निर्माण किया हुआ यह बहुमूल्य धातु है।


लाख को बनने में 3-4 महीने का समय लगता है। इसे साल में दो बार लगाया जाता है। जून-जुलाई और फरवरी-अप्रैल के महीने लाख की खेती के लिए अनुकूल होते हैं। करीब 250 ग्राम लाख की कीमत 2000 रुपये से 2200 रुपये होती है।


हमारे वन क्षेत्रों में मुख्य रूप से पलाश, बेर और कुसुम के पेड़ों पर लाख लगाया जाता है। यह ग्रामीण किसानों द्वारा उत्पादन किया जाता है तथा उत्पादित होकर शहरों के कारखानों में उन्नत अभिक्रिया के लिए लाया जाता है। लाख का इस्तेमाल कारखानों में नाना प्रकार के रेडीमेड वस्तुओं को बनाने में किया जाता है।


लाख के अनेक उत्पाद हम रोज़ाना इस्तेमाल करते हैं लेकिन शायद हम उसके बारे जानते ही नहीं हैं। क्या आपको मालूम है कि लाख का सबसे लोकप्रिय इस्तेमाल चूड़ियां बनाने में होता है?


इसके अलावा कॉस्मेटिक्स जैसे नेल पॉलिश में चमक के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। पटाखों में रंग डालने के लिए भी लाख ही काम आता है। लकड़ियों के फर्नीचर में चमक लाने के लिए भी लाख से पॉलिश किया जाता है।


लाख का उत्पादन निरंतर हर वर्ष ग्रामीण किसानों द्वारा चलता रहता है। इन वनोपज से गांवों के गरीब किसानों की अर्थिक स्थिति सुधारने में बहुत मदद मिलती है। ये किसानों के मुख्य कारोबार जैसे खेती पर अन्य आमदनी कमाने का अवसर देता है।


इसके लिए अलग से मेहनत नहीं करनी पड़ती है, क्योंकि इसे पेड़ों पर बस लगाना होता है और लाख का कीड़ा इसे बनाता रहता है। ये पेड़ की टहनियों पर उगते हैं।

लाख का व्यापार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ने के साथ-साथ कारोबार के लिए काफी सुखद है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लाख का उत्पादन होता है, तो शहरों के व्यापारी लाख खरीदने तथा उसे गाँव से कारखानों तक पहुंचने के लिए दूर-दूर गाँवों में अपना दुकान लगाते हैं।


गाँव में लाख की दुकान लगाने से व्यापारी सस्ते में ग्रामीण किसानों से लाख खरीद पाते हैं, जो उनके व्यापार के लिए फायदेमंद होता है। वहीं, किसानों के लिए इन दुकानों पर बेचने की सुविधा बढ़ती है और उन्हें बेचने के लिए दूर जाने का खर्चा भी बचता है।


किसानों के लिए लाख की खेती फायदे का सौदा है, क्योंकि इसकी डिमांड शहरों में काफी ज़ोर से है लेकिन कई बार शहरी कारोबारी किसानों से बहुत कम दर पर लाख खरीदते हैं, जो किसानों के लिए नुकसानदायक होता है मगर यह भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि लाख वनोपज से गाँवों के गरीब किसानों को आर्थिक सहायता मिलती है।


ज़रूरत है कि सरकार लाख की खेती को पहचानते हुए विकास और उन्नति के लिए इसे एक माध्यम बनाए ताकि वे लाख के वितरण और उसकी कीमतों पर सही निगरानी रख सकें। इससे किसानों को लाख की खेती में आर्थिक, प्रशासनिक और कौशल सहायता मिलेगी।


हम तो सभी किसानों से यही कहेंगे कि फसल की खेती के साथ इसकी भी खेती करें और खुद के साथ-साथ देश को भी मज़बूत करने में सहयोग करें, क्योंकि किसान आर्थिक रूप से मज़बूत होंगे तो देश भी मजबूत होगा।



लेखक के बारे में- राकेश नागदेव छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करते हैं। वो खुद की दुकान भी चलाते हैं। इन्हें लोगों के साथ मिल जुलकर रहना पसंद है और वो लोगों को अपने काम और कार्य से खुश करना चाहते हैं। उन्हें गाने का और जंगलों में प्रकृति के बीच समय बिताने का बहुत शौक है।


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

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