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छत्तीसगढ़ के आदिवासी कैसे करते है कार्तिक भगवान की पूजा

हमारे पूरे भारत देश में 33 करोड़ देवी-देवता मनाए जाते है और हमारे भारत देश में अलग-अलग जाति के लोग भी निवास करते हैं। तो हर जाति के हर धर्म के लोग अलग-अलग देवी देवता को मानते हैं। उनमें से एक है श्री कार्तिक भगवान जो कि भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कहलाते हैं। इसमें हम 4 देवी देवताओं की पूजा करते हैं — कार्तिक भगवान, शिव भगवान, आवरी माता और माता तुलसी। जो आंवले का पौधा होता है, उसी को आवरी माता बोलते हैं, और पूजा करते हैं।


श्री भगवान कार्तिक की पूजा दशहरा की रात्रि लगभग 3:00 बजे शुरू करते है और उसी रात्रि से नहाना चालू करते हैं और यह सिलसिला एक महीने तार जारी रहता है। हर रात को 3:00 बजे उठकर तलाब या फिर नदी में नहाने जाते हैं। इसके बहुत सारे नियम रहते है – जैसे कि अगर कोई भी इंसान 3:00 बजे रात्रि में उठकर कार्तिक नहा रहा है, तो उसको इस नियम का पालन करना पड़ता है। जब हम कार्तिक नहाने के लिए जाते है, तो लड़का-लड़की, महिला-पुरुष सभी इसमें भाग लेते है। महिला और पुरुष अलग-अलग जगह नहाते हैं ,और सभी एक साथ पूजा करते हैं।

पूजा का सामान


कार्तिक पूजा के नियम कुछ इस तरह है:

  1. लौकी नहीं खानी है

  2. पत्ते में खाना नहीं खाना है

  3. नाखून नहीं काटने है

  4. बाल नहीं काटने है

  5. शेविंग नहीं कराना है

  6. मांस, मछली, और अंडा नहीं खाना है

  7. जब रात्रि में 3:00 बजे उठकर नहाते हैं, तो जिन कपड़ों को पहनकर नहाने के लिए जाते है, उन्हीं कपड़ों में पूजा करते है। उसके बाद अपने कपड़े बदलने है।

  8. हम सुबह-सुबह जो बाजार में टूथ्पेस्ट, ब्रश इस्तेमाल यूज करते हैं, वह इस समय उपयोग नहीं करने है। हम साधारण से पेड़ से छोटी टहनी तोड़कर ब्रश करेंगे।

  9. जब कार्तिक पूर्णिमा आती है, तो हम रात में सुखी लकड़ी को तोड़कर, उसमे पोनी रखकर दीया बनाकर तलाब या फिर नदी में बहा देते हैं। हमारा मानना है, ऐसा करने से जो मांगो वह मिलता है। हम जिस दिन कार्तिक भगवान की पूजा करते हैं, उस दिन को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। चाहो तो आप कलेंडर में चेक कर सकते हो।

भगवान शिव और भगवान कार्तिक की पूजा करते हुए


उस दिन हम गांव के सभी लोग- बच्चे से लेकर बूढ़े तक तलाब के मेड़ मे पूजा करने जाते हैं। यह कार्यक्रम दिन में होता है। जितने भी लोग कार्तिक भगवान की पूजा करते हैं, रोज 3:00 बजे रात्रि में नहाकर लड़कियाँ व लड़के इसमें पूरे बस्ती वालों को आमंत्रण करते हैं। हम बहुत सारे मिष्ठान बनाते हैं जैसे खीर, पूडी़, दाल, चावल, सब्जी आदि और इसे गांव वालों को प्रसाद के रूप में खिलाते हैं।


ऐसे होती है हमारे गाँव में कार्तिक भगवान की पूजा, क्या या आपके गाँव में भी होती है?



लेखक के बारे में: खाम सिंह मांझी छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई की है और वह अभी अपने गाँव में काम करते हैं। वह आगे जाकर समाज सेवा करना चाहते हैं।


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

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