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छत्तीसगढ़ के भूईलिम औषधी से रहे तंदरुस्त

नोट- यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है, यह किसी भी प्रकार का उपचार सुझाने की कोशिश नहीं है। यह आदिवासियों की पारंपारिक वनस्पति पर आधारित अनुभव है। कृपया आप इसका इस्तेमाल किसी डॉक्टर को पूछे बगैर ना करें। इस दवाई का सेवन करने के परिणाम के लिए Adivasi Lives Matter किसी भी प्रकार की ज़िम्मेदारी नहीं लेता है।


लेखक- खाम सिंह मांझी


छत्तीसगढ़ की खूबसूरती यहां के पहाड़ों से आती है। यहां के सबसे बड़ी पहाड़ियों में से एक, मलेवा अंचल के नीचे एक छोटा सा गांव बसा हुआ है। इसे हम केरगांव के नाम से जानते हैं। ये उड़ीसा राज्य के सीमा पर है। यहां अनेक प्रकार की औषधियां मिलती है। इनमें से एक है भूईलिम औषधि। मान्यता है कि ये बहुत सारे बीमारियों को मात देता है।

भूईलिम के क्या उपयोग हैं


भूईलिम के लगातार इस्तेमाल से शरीर को कोई भी बीमारी छू नहीं सकती, ऐसे लोग कहते है। यह अनेक बीमारियों जैसे मलेरिया, टाइफाइड, पीलिया, पथरी, सर्दी खासी, बुखार, कमजोरी, और खुजली में कारगर मानी जाती है। यह फंगल इंफेक्शन से होने वाली तमाम बिमारियों के इलाज के लिए उपयुक्त है।


कैसे करें भूईलिम का उपयोग


भूईलिम को कई प्रकार से इस्तेमाल किया जा सकता है। भूईलिम के पौधे को सबसे पहले मिट्टी से बाहर निकाला जाता है। उसके बाद इसे पानी में रखा जाता है। इसे धोकर, पत्थर पर रख इसे किसी भारी वस्तु से पीसा जाता है। इसके पश्चात भूईलिम का रस निकालकर एक ग्लास पानी के साथ मिलाया जाता है। या फिर इसे किसी भारी वस्तु जैसे पत्थर से दबाने के बाद एक ग्लास पानी में बिना रस निकाले डाल दिया जाता है। ऐसे इसे लगभग 20 से 25 मिनट रखा जाता है ताकि उसका सारा पदार्थ ग्लास के पानी में अच्छे से मिल जाए। अब इसे पिया जा सकता है। इसका स्वाद बहुत कड़वा होता है। पर इस कड़वाहट को सहन कर लेने से बहुत फ़ायदे हैं।


भूईलिम को लगातार उपयोग करने से शरीर हमेशा ठीक अवस्था में रहता है। परंतु हर चीज की तरह इसके भी कुछ दुष्परिणाम हैं। इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए कि लगातार अंतराल में इसका सेवन करे। इसके सही मात्रा में उपयोग से सेहतमंद जीवन जिया जा सकता है।


लेखक के बारे में: खाम सिंह मांझी छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई की है और वह अभी अपने गाँव में काम करते हैं। वह आगे जाकर समाज सेवा करना चाहते हैं।

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