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छत्तीसगढ़ में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की पहल

ग्राम पोड़ी-उपरोड़ा में “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” का कार्यक्रम रखा गया, जहाँ आसपास के लोग भी इस कार्यक्रम में शामिल थे। कार्यक्रम के माध्यम से बताया गया कि बालिकाओं का संरक्षण और उन्हे सशक्त कैसे करना है।“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना की शुरुआत सबसे पहले २२ जनवरी २०१५ को की गई, और निम्न लिंगानुपात वाले १०० जिलों में प्रारंभ किया गया। २०११ की जनगणना के अनुसार लिंगानुपात के आधार पर प्रत्येक राज्य में कम से कम १ जिले के ७०० जिलों का पायलट के रूप में चयन किया गया है।


स्कूल के बच्चों ने किया प्रदर्शन


बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के कार्यक्रम में सभी लोगों को बताया जाता है कि कैसे बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करना, बालिकाओं को शोषण से बचाना, व उन्हें सही गलत के बारे में अवगत कराना महत्वपूर्ण है। इस योजना का अर्थ बालिकाओं को सामाजिक और वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाना है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य बेटियों के अस्तित्व को बचाना, उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना, शिक्षा के साथ बेटियों को अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ाना एवं उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करना है। इस मुद्दे को सार्वजनिक विचार-विमर्श का विषय बनाना और उसे संशोधित करते रहना है। बालिकाओं और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए और समान मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए यह एक सामाजिक आंदोलन जागरूकता अभियान का कार्य करता है। इस तरह सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए पहचान देते हुए एकीकृत कार्यवाही करना सुशासन का पैमाना बनेगा।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम मे भाग लेती बच्चियाँ


कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं को अभी के समय में किस तरह से रहना चाहिए और सीखना चाहिए, यह बातें सिखाई गई, जिससे सभी बालिकाएं अपनी सुरक्षा कर सकती हैं और खुद को परेशानियों से बचा सकती हैं। स्कूलों में भी यह कार्यक्रम किया जाता है, और छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा बहुत ही अच्छे और सराहनीय तरीके से “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” से संबंधित कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है। इस कार्यक्रम की शुरुआत होने से पहले, बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है। स्कूल के बच्चे बहुत ही उत्साह से प्रोग्राम मे हिस्सा लेते हैं और जिनका कार्यक्रम अच्छा होता है उन बच्चों को अंत में उपहार दिए जाते हैं।

कार्यक्रम के अन्त मे बच्चों को पुरस्कार दिए जाते है


सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक की भूमिका में धारणा जिला, ब्लॉक और ज़मीनी स्तर पर स्थानीय महिला संगठनों एवं युवाओं की सहभागिता लेते हुए, पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय निकायों, और ज़मीनी स्तर पर जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रेरित एवं प्रशिक्षित करते हुए, यह कार्यक्रम अंतर क्षेत्रीय और अंतत समायोजन को सक्षम करता है।

कार्यक्रम मे बालिकाओ को आगे बढ्ने के लिये प्रेरित किया गया


बेटों के समान है बेटियाँ


यह कार्यक्रम पिछले ५ सालों से आयोजित किया जा रहा हैं। इसमें सभी विद्यार्थियों के घर परिवार के लोग उपस्थित रहते हैं। अब बेटियों को बेटों से अलग नहीं माना जाता और दोनों को समान माना जाता है। अभी के समय में बालिकाएं सभी जगह हिस्सा लेती हैं, चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र में हो या नौकरी पेशा, चाहे वह राजनीति के क्षेत्र में हो, या घर-गृहस्ती। वह सभी जगह को अच्छे से संभाल सकती हैं। बालिकाओं को दुनिया के सभी बुराइयों से बचाया जा सके इसीलिए यह बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ कार्यक्रम को सभी जगह मनाया जाता है।


लेखिका के बारे में- वर्षा पुलस्त छत्तीसगढ़ में रहती है। पेड़-पौधों की जानकारी रखने के साथ-साथ वह उनके बारे में सीखना भी पसंद करती हैं। उन्हें पढ़ाई करने में मज़ा आता है।


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

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