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जानिए वनांचल क्षेत्र में रहने वाले बिसौहा राम धुर्वे की विपरीत परिस्थितियो की संघर्ष भरी दास्तां

Updated: Nov 21, 2023

मनोज कुजूर द्वारा सम्पादित


वनांचल क्षेत्र ऐसे क्षेत्र को कहते हैं, जहां शहरों की अपेक्षा सुविधाओं का प्रायः अभाव रहता है साथ ही घने जंगल, ऊंचे-ऊंचे पर्वत पहाड़ होते हैं। जिनके चलते उस क्षेत्र का विकास कम ही हो पाया होता है। इसलिए वनांचल में रहने वाले लोग कुछ महीनों या सालों के लिए अपने गावों से दूर प्रवास करते हैं l जंगल क्षेत्र के निवासी अपने जीवन यापन के लिए कृषि कार्य में ही निर्भर रहते हैं। साथ ही वनों से थोड़ा बहुत लाभ प्राप्त कर लेते हैं।

कबीरधाम जिला के पंडरिया ब्लॉक से 16 किलोमीटर की दूरी में ग्राम कडमा के निवासी बिसौहा राम धुर्वे जिनके पिताजी चैन सिंह धुर्वे जी जो एक किसान हैं l वे अपने डेढ़ एकड़ जमीन में कृषि कार्य करते हैं, साथ ही मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं l चैन सिंह धुर्वे की एक बेटी और दो बेटे हैं और अपनी बड़ी बेटी का विवाह कर चुके हैं। बिसौहा राम ने अपनी 12वीं की पढ़ाई अपने क्षेत्र में ही किया। उसके बाद सुविधाओं के अभाव में उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई कवर्धा में करने का सोचा, अपने पिताजी को बताया कि वह कवर्धा में रहकर ही पढ़ाई करेगा, तो उनके पिताजी ने अच्छा है बोलकर उसका साथ दिया। बिसौहा राम कवर्धा में रूम किराया में लेकर पढ़ाई करने लगे और साथ ही बहुत सारे नौकरी के लिए फॉर्म भरते जा रहे थे। जिसमें उन्हें असफल ही हाथ लगी लेकिन उहोंने अपनी हिम्मत से काम लेकर अपना प्रयास जारी रखा और उसके पिताजी उसके रहने खाने के लिए हर महीना पैसा भेजते रहे लेकिन बिसौहा राम जब अपने घर की हालतो के बारे में सोचते थे, तो उनको भी बुरा लगता था l वो अभी भी अपने पिताजी से पैसे लेते हैं। लेकिन वो मजबूर थे क्योंकि उनके पास कोई रोजगार का साधन ही नहीं था। लेकिन उन्हें यकीन था कि वो एक दिन जरूर अपने घर के हालतो को जरूर बदलेंगे।


उनके अंदर देश सेवा की भावना भी कूट - कूट भरी थी। जिसके चलते उन्होंने कवर्धा में फ्लाइंग 09 के नाम एक ग्रुप से जुड़ गए और अपने तैयारी को जारी रखे। फलाइंग 09 में उन्हें निशुल्क कोचिंग के साथ फिजिकल की तैयारी रोजाना कराया जाता था। फ्लाइंग 09 के कोच राजेश वारते के इस ग्रुप में बहुत सारे लड़के एवं लड़कियां ट्रेनिंग लिया करते हैं। साथ में राजेश वारते जी उनके साथ खुद अपनी भी तैयारी करते हैं और ग्रुप के लोगों का मार्गदर्शन करते हैं कि उनको कैसे तैयारी करना चाहिए और भर्ती आने होने पर कैसे अपने फिजिकल परीक्षा में अच्छा नंबर लाना है। जिससे मोटिवेट होकर ग्रुप के सभी सदस्य सुबह- सुबह ही ग्राउंड में आ जाते हैं। जिसमें अपनी तैयारी के लिए बिसौहा राम भी शामिल हुआ करते थे। बिसौहा राम के पिताजी के आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी कि उन्हें हर महीना उनकी मदद कर सकें। जिस वजह से बिसौहा राम अपनी तैयारी बीच में ही छोड़कर रायपुर के एक कंपनी में काम करने चले गए थे।


साथ ही अपने फ्लाइंग ग्रुप 09 के सदस्यों से संपर्क बनाए हुए थे। बीच-बीच में तैयारी कैसे चल रहा की जानकारी लेते रहते हैं। बिसौहा राम भी सुबह रनिंग के लिए निकल जाते थे। उसके बाद काम करने जाते थे। ऐसे ही उनको काम करते हुए आठ से नौ महीना हो गया था और उन्हें अपने फ्लाइंग ग्रुप 09 के सदस्यों से पता चला कि SSC में जो फॉर्म भरे थे उनका परीक्षा होने वाला है। तो रायपुर से वापस आ गए बिसौहा राम एक दिन में पांच से छ: घंटे पढ़ाई करने लगे। SSC की परीक्षा में वह पास हो गए। अपने फ्लाइंग ग्रुप 09 के कोच से मार्गदर्शन लेते रहें कि कैसे अपना फिजिकल निकालना है और उनके निर्देशों के साथ तैयारी करते रहें। बिसौहा ने फिजिकल भी पास कर लिया जिससे उन्हें बहुत खुशी हुआ कि SSC में वह पास हो गए हैं। उनका चयन CISF में हुआ। उन्होंने अपने घर में बताया कि उसकी नौकरी लग गई है तो घर के सभी लोग बहुत खुश हुए और इसी दौरान बिसौहा CISF की ट्रेनिंग के लिए चले गए।

बिसौहा राम और उनकी मां


बिसौहा राम जब CISF में तीन महीना की ट्रेनिंग कंप्लीट करके 15 दिनों की छुट्टी में जब घर आए तो उनके माता-पिता,भाई-बहन सब लोग बहुत खुश थे। पूरे घर में खुशी का माहौल था। बिसौहा राम की माता जी थाली लिए अपने बेटे के स्वागत के लिए घर के द्वार में खड़ी थी। बिसौहा राम के गांव घर के सभी लोग उनके स्वागत के लिए आए थे। बिसौहा राम अपने माता- पिता के चेहरों में मुस्कान देख कर बहुत ही खुश हुए थे।


बिसौहा राम का कहना है कि जिस गरीबी से उनका परिवार गुजरा है। वैसी स्थिति वह कभी नहीं आने देंगे और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को ठीक करना उसका पहला कर्तव्य रहेगा। उनके माता-पिता बुजुर्ग हो गए हैं और वह लोग अब पहले जैसे मेहनत नहीं कर सकते हैं। अब उन लोगों को काम करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि अब उनका बेटा उनकी इच्छाओं को पूरा करेगा।


बिसौहा राम राजेश वारते कोच को उपहार भेंट देते हुए


बिसौहा राम ट्रेनिंग से घर वापस आने के बाद अगले दिन अपने फ्लाइंग ग्रुप 09 ग्रुप के सदस्यों से मिलने पहुंचे थे l साथ ही अपने फ्लाइंग 09 ग्रुप के कोच राजेश वारते को ट्रैकसूट भेंट के रूप में दिया और अपने ग्रुप के भाई बहनों को मोटिवेट किये कि सफलता पाने के लिए किन हालातों से गुजरना पड़ता है और सफलता के लिए कैसी मेहनत करनी चाहिए।


फ्लाइंग ग्रुप 09 के कोच राजेश वारते जी का कहना है कि जब जब वह अपने ग्रुप के सदस्यों को कामयाब होते हुए देखते हैं तो बहुत ही खुश होते हैं कि उनके द्वारा दिए गए मार्गदर्शन व्यर्थ नहीं गया है l अपने मेहनत से कामयाब हो रहे हैं और हमारे ग्रुप फ्लाइंग 09 का नाम रौशन कर रहे हैं।


बिसौहा राम का फ्लाइंग 09 के कोच राजेश वारते जी के बारे में उनका मानना है कि राजेश वारते जी एक अच्छे कोच हैं l वे हमेशा अपने ग्रुप के सदस्यों को अच्छे मार्गदर्शन देते हैं l बिना किसी भेद-भाव के साथ फिजिकल और रिटर्न परीक्षा की निःशुल्क तैयारी करवाते हैं। जिसके चलते बहुत से गरीब व मध्यम वर्ग के बच्चे अपने जीवन में कामयाब हुए हैं।


इस सच्ची कहानी से प्राप्त निष्कर्ष: बिसौहा राम धुर्वे जैसे वनांचल क्षेत्र के गरीब परिवार से आए एक छात्र ने मेहनत और संघर्ष से अपने लक्ष्य को पूरा किया। वह अपने सपनों को पाने के लिए जान की भूख को देखकर भी हार नहीं माना और उन्होंने अपनी कठिनाइयों का सामना किया। उनका उदाहरण हमें यह सिखाता है कि यदि हम मेहनत करें और अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहें, तो हम किसी भी परिस्थिति में सफल हो सकते हैं।


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