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जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किया गया छत्तीसगढ़ के आदिवासी बच्चों के लिए ट्रेनिंग

पोडी ब्लॉक में आदिवासी छात्र-छात्राओं को शिक्षा से जागरूक कराने के लिये १० दिन का ट्रेनिंग आयोजित किया गया, जिसमें बच्चों को तर्कशक्ति, समय प्रबंधन, खेल, इत्यादि सिखाया गया।


इस ट्रेनिंग मे आदिवासी छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ने के लिए बहुत से कार्यक्रम करवाए जाते हैं, जिसमें सिखाया जाता है कि बच्चों को आगे कैसे बढ़ना है, और उनके अंदर के डर और झिझक को दूर करने का प्रयास करते हैं। सभी छात्र-छात्राओं को बताया जाता है कि एक बार प्रयास करने से कभी हार नहीं माननी चाहिए और अगर कोई काम एक बार में नहीं होता तो उसे दोबारा करना चाहिए। आदिवासी बच्चों को हर साल सभी चीजों का ज्ञान कराया जाता है। कार्यक्रम में सभी बच्चों को बताया गया कि समय का इस जीवन में क्या महत्व है, और समय पर रहते आप क्या कर सकते हैं। क्रम में सभी आदिवासी बच्चों को आगे लाने के लिए प्रयास किया गया।


डर व झिझक की वजह से बच्चे अच्छे से अपना परिचय नहीं दे पाते। आदिवासी बच्चों को ट्रेनिंग मे अपना परिचय देने के लिए बोला गया। आदिवासी बच्चों ने अपना अपना परिचय दिया – पहले अपने गांव का नाम बताया फ़िर अपना नाम और कहां पढ़ाई करते हैं ये भी बताया। इन सब चीजों के बारे में बताया गया ताकि वह बच्चे कहीं जाए तो अपना परिचय अच्छे तरीके से दे सकें।


आदिवासी बच्चों को तर्कशक्ति का भी ज्ञान कराया गया। इस कार्यक्रम में लड़कियों को भी जागरूक कराया जाता है कि अगर कोई गलत काम कर रहा है, तो उसके विपक्ष मे बोलना भी सीखें। इस कार्यक्रम में पक्ष-विपक्ष के बारे में भी जानकारी दी गई – विपक्ष में क्या बोलना चाहिए, क्या अच्छा है और क्या गलत है के बारे में भी बताया गया जिस से वह अपने सही गलत का निर्णय ले सकते हैं।


ये जो आदिवासी बच्चों के लिए कार्यक्रम रखा गया था, उसके जरिए आदिवासी बच्चों को शिक्षा से जागरूक कराया जा रहा था, क्योंकि सभी आदिवासी बच्चों को इन सभी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी नहीं रहती है। पर्याप्त अवसर और बढ़ावा न मिलने की वजह से आदिवासी बच्चे हमेशा पीछे ही रह जाते हैं, लेकिन आज के सभी आदिवासी बच्चे पढ़ाई में सबसे आगे है। इस परीक्षा के बीच में सभी बच्चों का मेरिट टेस्ट हुआ जिसमें सबसे ज्यादा अंक वाले बच्चे को महीने में ३०० रुपए दिए जाएंगे। टेस्ट की वजह से बच्चे अच्छे तरीके से पढ़ाई भी करते हैं और उनके आने वाली परीक्षाओं की तैयारी भी हो जाती है। आदिवासी बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए बहुत सारे कार्यक्रम किए जाते हैं ।

खेल मे भाग लेते आदिवासी बच्चे


ट्रेनिंग मे अलग-अलग खेल, जैसे कबड्डी और दौड प्रतियोगिता भी आयोजित की, और खेल में प्रथम आने वाले बच्चों को पुरस्कार भी दिया गया।

दौड प्रतियोगिता मे भाग लेते बच्चे


रंगोली प्रतियोगिता के साथ साथ कबड्डी की भी प्रतियोगिता आयोजित की गयी, जिसमें सभी आदिवासी छात्रों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के अंत में जो बच्चे रहते हैं उनको पुरस्कार दिया जाता है और खेल में भी जो बच्चे पीछे रहते हैं, उन सभी को पुरस्कार देकर सम्मानित करते हैं और अगले साल के कार्यक्रम के लिए उनका उत्साह बढ़ाया जाता है।



लेखिका के बारे में- वर्षा पुलस्त छत्तीसगढ़ में रहती हैं। वह स्टूडेंट हैं जिन्हें पेड़-पौधों की जानकारी रखना और उनके बारे में सीखना पसंद है। उन्हें पढ़ाई करने में मज़ा आता है।


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

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