top of page

देखिए कैसे बनाते है त्रिपुरा के आदिवासी राइस बीयर

भारत के नॉर्थ ईस्ट के कोने में एक राज्य है, जिसका नाम है त्रिपुरा। त्रिपुरा में एक छोटा सा गॉंव, जिसका नाम है विदा चंद्र पारा और इस गॉंव में रहते हैं, त्रिपुरा के एक आदिवासी समुदाय-देव-वर्मा। इस समुदाय के लोग सदियों से अपने हाथों से राइस बीयर बनाते आ रहे हैं।

यह पत्ते राइस बनाने में काम आते है। फोटो-जोएल देब बर्मा


कैसे बनाते है राइस बीयर?


राइस बीयर बनाने के लिए जंगल की हरी पत्तियों की ज़रूरत होती है। इन पत्तों को इकट्ठा करने के लिए बहुत बड़े जंगल में जाना पड़ता है। इन पत्तों के बिना राइस बीयर का नशा नहीं आता है।


इन पत्तों और चावल को मिलाकर बनता है राइस बीयर, जिसका नाम कोकबोरोक में ‘Chuwan’ है। इन पत्तों में थोड़ी सी मिर्ची और थोड़ा चावल पानी में 5 से 10 मिनट तक भिंगोया जाता है।


इन पत्तों के मिश्रण को मिलाने के लिए ‘Rwsam’ और ‘Romo’ चाहिए। ‘Rwsam’ और ‘Romo’ बड़े पेड़ को काटकर बनाया जाता है। यह बहुत ही भारी होते हैं और इनको बनाने और इस्तेमाल करने के लिए बहुत ताकत की ज़रूरत होती है।

पत्तों को मिलाने का तरीका। फोटो- जोएल देब बर्मा


इस ‘Chuwan’ को हाथ से बनाकर 2-3 दिन के लिए धूप में सूखने के लिए रखा जाता है। सूखने के बाद यह सफेद रंग का दिखता है और बहुत मज़बूत भी होता है।


इस Chuwan को चावल में मिलाया जाता है और 20 से 30 मिनट तक हवा खाने के लिए रखा जाता है। यह ठंडा होने के बाद ‘Bwtwk’ यानी राइस बीयर बनता है।


केले के पत्ते और बैम्बू की ज़रूरत


राइस बीयर को बनाने के लिए केले के पत्ते और बैम्बू (बांस) की भी ज़रूरत पड़ती है। इसके बाद इसे ‘Langi’ में डालते हैं और उसको कस के मज़बूती से बांधना पड़ता है। 3 से 7 दिन तक उसको ऐसे ही रखना पड़ता है। यह समय खत्म होने के बाद उसमें थोड़ा सा पानी डालते हैं।अब तक इसमें मिठास भी आ जाती है। आप जितने दिन तक इसे रखेंगे, उतनी ही मिठास बढ़ती रहेगी। Bwtwk को लोग पाइप से भी पीते हैं।

फोटो- जोएल देब बर्मा


राइस बियर को गोरिया, हंग्राई, ममिता, होजागिरी जैसे त्यौहारों में ज़्यादा पिया जाता है। त्यौहार के समय सब लोग एक साथ बैठकर इस राइस बीयर का आनंद उठाते हैं। यह हमारी आदिवासी संस्कृति का भाग है।



लेखक के बारे में- जोएल देब बर्मा त्रिपुरा का निवासी हैं। यह अभी BA की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें गाने और घूमने का शौक है और इन्हें लोगों की मदद करना अच्छा लगता है। यह LLB की पढ़ाई करके वकील बनना चाहते हैं।


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

Commenti


bottom of page