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बड़े हादसे को निमंत्रण देता है छत्तीसगढ़ का ये बाज़ार

लेखक- राकेश नागदेव

छत्तीसगढ़ के ज़िला कोरबा में बसा हुआ है बिंझरा गाँव। यहां साप्ताहिक बाज़ार लगता था मगर राजनेताओं की राजनीति के कारण यह बाज़ार गाँव से हटकर सड़क पर आ गया है।

अब यह राष्ट्रीय राजमार्ग मेन रोड पर लगता है। यह कटघोरा से 12 किलोमीटर दूर पेंड्रा में स्थित है। यह रोड कटघोरा से शुरू होता है और मध्यप्रदेश के अमरकंटक तक जाता है। यह आदिवासी बहुल क्षेत्र है।

दो राज्यों- छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश को जोड़ने के कारण, इस रोड पर भारी गाड़ियों जैसे बसों और ट्रकों की काफी गतिविधियाँ होती हैं। ये इस बाज़ार पर ख़रीददारी कर रहे लोगों और दुकानदारों के जीवन और सामान को खतरा पहुँचता है।

सड़कों पर बड़ी गाड़ियों की यातायात। फ़ोटो- राकेश नागदेव

बाज़ार हर गुरुवार को लगता है। यहां खान, पान, कपड़े, बर्तन इत्यादि सब प्रकार की चीज़े मिलती हैं। इसलिए यहां बच्चे, बूढ़े, जवान, सबकी मौजूदगी होती है।

इंसानी जिंदगी के साथ जानवरों और मवेशियों की भी जान खतरे में पड़ गई हैं। वाहनों के व्यस्त यातायात से लोग हमेशा चिंतित और डरे रहते हैं कि कब, किस दिशा से आते हुए भारी वाहन की वो चपेट में ना आ जाए।

बाज़ार में ख़रीददारी करती महिलाएं। फ़ोटो- राकेश नागदेव


इस रोड पर वाहन लगातार और तेजी से गुजरते हैं, जो कभी भी जन-धन का नुक़सान कर सकते है। अफसोस की बात है कि छोटी-मोटी घटनायें यहाँ आम बात हो गई है। इस समस्या का हल निकाला नहीं जा रहा। ये बाजार दो गाँवों: कौआताल और बिंझरा के बीच में लगता है।


अगर इस बाज़ार को स्थापित करना है, तो दोनों गांव चाहते हैं कि उनके गांव में लगे। किसी भी प्रकार की सहमति नहीं बनने से ये अभी तक सड़क पर ही है। इसके ऊपर दुकानदारों की राजनीति भी हैं। वे चाहते हैं कि बाजार रोड किनारे ही लगे ताकि उनकी दुकान अच्छे से चलती रहे।

सब अपनी-अपनी रोटी सेंकने में लगे हुए हैं। दिक्कत तो आम लोगों को उठानी पड़ती है। नेताओं और बड़े लोगों के सामने आम लोग क्या भी कर सकते हैं? जनता तो सिर्फ खड़े होकर ताली ही बजा सकती है।

जाने कितनी बार आवाज़ उठाई गई है, पर ना तो पंचायत के मुखिया, ना ही प्रशासन के सर पर जूं रेंगती है। इस मामले पर बात करते ही, सभी हामी भरते हैं कि जल्द ही इस बाज़ार को कहीं दूसरी जगह पर स्थापित किया जाएगा, लेकिन इस दिशा में किसी प्रकार के कोई कदम नहीं लिए जाते।

बात सिर्फ यहां की नहीं, पर हर जगह का यही हाल है। ये अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिलता है। प्रशासन को सख्त नियम बनाने चाहिए ताकि लोग सुरक्षित रहें और किसी भी प्रकार की जन धन की हानि ना हो। लोगों को बेखौफ जीने और बाज़ार में जानी की आज़ादी होनी चाहिए।



लेखक के बारे में- राकेश नागदेव छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करते हैं। यह खुद की दुकान भी चलाते हैं। इन्हें लोगों के साथ मिलजुल कर रहना पसंद है और यह लोगों को अपने काम और कार्य से खुश करना चाहते हैं। इन्हें गाने का और जंगलों में प्रकृति के बीच समय बिताने का बहुत शौक है।


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था



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