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वे औषधीय पौधे, जो गाँवों में पाए जाते हैं

Updated: Jan 31, 2021

आदिवासी जीवन प्रकृति से जुड़ा हुआ है। वह प्रकृति से खाने-पीने, पहनने-ओढ़ने, रहने का सामान और दवाइयां आदि पाते हैं। उनकी मान्यता है कि ऐसे औषधीय पौधे ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जिनके उपयोग से कई प्रकार के रोगों और चोटों का इलाज होता है।

गंगादूबी की पत्तियां। फोटो साभार- वर्षा पुलस्त


बिच्छू, किट और सांप के काटने पर इनका उपयोग किया जाता है। कुछ औषधीय पौधों का इस्तेमाल घर में सजावट के लिए भी किया जाता है। ऐसे ही कुछ औषधीय पौधों के बारे में जानने के लिए हमने ग्राम कौवाताल के निवासी पवन सिंह से बात की।


अपने 67 साल के अनुभव से उन्होंने बताया,

कोरबा ज़िले के ब्लॉक पोड़ी उपरोड़ा के ऐसे कई जगह हैं, जहां ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिनका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।

उन्होंने हमें तीन मुख्य वनस्पतियों के बारे में बताया- विद्यानास, गंगादूबी और छुईमुई। इनका उपयोग औषधि के रूप में होता है।


विद्यानास

विद्यानास पेड़। फोटो साभार- वर्षा पुलस्त





विद्यानास घरों में पाया जाता है। इसका उपयोग बिच्छू के डंक मारने पर औषधि के रूप में किया जाता है, जिससे बिच्छू के डंक का जहर उतारा जाता है।

विद्यानास पौधे की पत्तियों एवं जड़ों को पिसकर डंक लगे हुए जगह पर लगाया जाता है, जिससे इसका असर तुरंत ही दिखने लगता है और पांच मिनट बाद जहर कम हो जाता है।

गंगादूबी

गंगादूबी की पत्तियों। फोटो साभार- वर्षा पुलस्त


गंगादूबी की पत्तियों और जड़ का उपयोग भी बिच्छू के जहर को उतारने के लिए किया जाता है, इससे बिच्छू का जहर बीस मिनट में ही उतर जाता है। इसका उपयोग सजावटी पौधे के रूप में घर व बगीचों में किया जाता है।


छुईमुई

गंगादूबी की पत्तियोंफोटो साभार- वर्षा पुलस्त


ऐसा माना जाता है कि छुईमुई पौधे की पत्तियों का उपयोग टी.बी. बीमारी के उपचार में किया जाता है। इसकी पत्तियों को पिसकर गुड़ के साथ खाया जाता है। छुईमुई के पौधे घरों व जंगलों में पाए जाते हैं।


इसे छत्तीसगढ़ में लाजवन्ती भी कहते हैं। इसकी पत्तियां इमली के पत्तों की तरह दिखती है लेकिन छुईमुई की पत्तियां छूने पर सिकुड़ जाती हैं। इसका उपयोग घरों में सजावट के लिए भी किया जाता है।

सबको इस तरह के पौधों को अपने घरों में लगाना चाहिए ताकि ज़रूरत पड़ने पर उस पौधे का उपयोग किया जा सके क्योंकि, ऐसे पौधे हमेशा लाभकारी होते हैं।

यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

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