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छत्तीसगढ़ में परीक्षा सिर पर, उत्तर पुस्तिका के लिए भटक रहे हैं प्राईवेट महाविद्यालय के विद्यार्थी

पंडित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय की वार्षिक ऑनलाइन परीक्षा 7 जून से शुरू होने वाली थी, जिसे कोरोना महामारी की वजह से एक सप्ताह आगे कर दिया गया। अब यह 15 जून से प्रारंभ हो रही है। परीक्षा से जुड़े अधिकारी सभी महाविद्यालय परीक्षा केंद्रों तक उत्तर पुस्तिका पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। लेकिन शासकीय कचना धुरवा महाविद्यालय, छुरा में पर्याप्त मात्रा में उत्तर पुस्तिका की पूर्ति नहीं हो पा रही है। इस वजह से निजी कचना धुरवा महाविद्यालय के नियमित विद्यार्थी रोज उत्तर पुस्तिका के लिए अपने परीक्षा केंद्र का चक्कर लगाते हुए भटक रहे हैं।

परीक्षा केन्द्र क्रमांक 302 शासकीय कचना धुरवा महाविद्यालय, छुरा जिला गरियाबंद।

स्थिति को देखते हुए कॉलेज ने शनिवार (12 जून) को और उत्तर पुस्तिकाओं की व्यवस्था की, लेकिन तब तक कई छात्र निजी दुकानों से पुस्तिका खरीद चुके थे। अगर परीक्षा प्रारम्भ होने के 4-5 दिन पहले उत्तर पुस्तिका मिल जाती तो सभी विद्यार्थी बिना किसी परेशानी के निश्चिंत हो कर परीक्षा देते। छात्र-छात्राओं का कहना है कि अगर समय पर उत्तर पुस्तिका नहीं मिलेगी तो उसका क्या उपयोग, इससे बेहतर है कि हम पिछले वर्ष की तरह स्वयं या दुकानों से उत्तर पुस्तिका तैयार करेंगे।


पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने यह घोषणा भी किया है कि अगर विद्यार्थी स्वयं उत्तर पुस्तिका बनाना चाहते हैं तो बना सकते हैं। परीक्षार्थियों को प्रश्नों का उत्तर A4 साइज की कापी में लिखना होगा। साथ ही परीक्षार्थी उत्तर पुस्तिका के लिए अधिकतम 32 पेज यानी 16 पन्नों का ही उपयोग कर सकते हैं। विद्यार्थियों ने परीक्षा केन्द्र शासकीय कचना धुरवा महाविद्यालय छुरा के पूरे स्टाफ से अनुरोध किया है कि वे निजी कचना धुरवा महाविद्यालय के विद्यार्थियों को परीक्षा की उत्तर पुस्तिका प्रदान करने का कष्ट करें।

महाविद्यालय क्रमांक 309 निजी कचना धुरवा महाविद्यालय छुरा, जिला गरियाबंद

पंडित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय बाकी कक्षाओं की वार्षिक ऑनलाइन परीक्षा 15 जून से लेने जा रही है। लेकिन इसी दौरन परीक्षा केंद्र शासकीय कचना धुरवा महाविद्यालय, छुरा में उत्तर-पुस्तिका समाप्त होने की जानकारी सामने आई है। महाविद्यालय के विद्यार्थी बेहद परेशान हैं। आगामी ऑनलाइन परीक्षा में छुरा नगर में स्थित शासकीय कचना धुरवा महाविद्यालय एवं निजी कचना धुरवा महाविद्यालय से हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं परीक्षा में सम्मिलित होंगे। विश्वविद्यालय की सुस्ती के कारण अभी तक महाविद्यालय परीक्षा केंद्रों में उत्तर पुस्तिका का पर्याप्त स्टाक नहीं पहुंच पाया है। विश्वविद्यालय के निर्देश अनुसार ऑनलाइन परीक्षा 15 जून से प्रारंभ होगी, वही निजी कचना धुरवा महाविद्यालय छुरा के विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिका लेने के लिए इतनी तपती धूप में 20 से 30 किलोमीटर जंगल, पहाड़, कच्चा रास्ता पार कर के रोजाना परीक्षा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। महाविद्यालय के नियमित विद्यार्थी नरेश कुमार नेताम, चंद्र कुमार सोरी, किशन सिन्हा, चुमेश सेन, दीपक कुमार सोरी, खिलावन सोरी, राज कुमार, गणिता नायक, भुनेश्वरी नायक, तारणी ठाकुर, नीलकंठ सोनी, प्रियंका ठाकुर, रम्हला (रानु) ठाकुर, नेत्रिका टेकाम, मुकुल ध्रुव, ईश्वर, महेश्वर ध्रुव दामिनी निषाद, किशन नेताम, नूतन साहू आदि ने बताया है कि हमें प्रवेश पत्र मिलने के बावजूद उत्तर पुस्तिका नहीं मिल पा रही है, रोज इतनी दूर से सायकल व बाइक चलाकर इतनी तेज तपती धूप में उत्तर पुस्तिका लेने अपने परीक्षा केन्द्र शासकीय कचना धुरवा महाविद्यालय छुरा में पहुंचते हैं, लेकिन हमें यही कहा जाता है कि "अभी उत्तर पुस्तिका उपलब्ध नहीं है, नहीं पहुंची है। उत्तर पुस्तिका परीक्षा केन्द्र में पहुंचने के बाद फिर आप लोगों के ग्रुप में उत्तर पुस्तिका वितरण का दिन बता दिया जाएगा।" विद्यार्थियों के लिए ये जवाब परेशानी को और बढ़ाने वाला ही है।


12 जून से पहले महाविद्यालय परीक्षा केंद्र के प्रभारी डॉ पीके भोई ने कहा था, "विश्वविद्यालय से जितनी उत्तर पुस्तिका काफी मांगी गई थी, वह अभी तक महाविद्यालय परीक्षा केंद्र को उपलब्ध नहीं हुई है, और जितनी उत्तर पुस्तिका हमारे पास भेजी गई है उसे करोना प्रोटोकॉल को नजर रखते हुए सीमित संख्या में छात्र-छात्राओं को कक्षा के अनुसार सूचना देकर तारीख अनुसार वितरण किया जा रहा है। उत्तर पुस्तिका उपलब्ध होने पर नियमित स्वध्यायी एवं निजी कचना धुरवा महाविद्यालय के परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका वितरण किया जाएगा। जिसके लिए आपकी कक्षाओं अनुसार व्हाट्सएप ग्रुप में सूचित कर दिया जाएगा।"


शासकीय कचना धुरवा महाविद्यालय छुरा के सभी नियमित विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिका मिल चुकी है। विश्वविद्यालय वार्षिक परीक्षा के लिए प्रति वर्ष 1100 से 1200 रुपये तक लेती है फीस।


यह आलेख आदिवासी आवाज़ प्रोजेक्ट के अंतर्गत मिजेरियोर और प्रयोग समाज सेवी संस्था के सहयोग से तैयार किया गया है।



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