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आइए जाने गांव में बनाए गए कूड़ेदान का कितना प्रयोग कर रहे हैं?

गांव की स्थितियों को सुधारने के लिए कई वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं,सड़क से लेकर शिक्षा तक हर उन व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है,जो लोगों के आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सुधारने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं,देश को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के लिए कई योजनाओं के द्वारा ग्रामीण लोगों को रोजगार और स्वच्छता प्रदान किए जा रहे हैं,ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर दिखाई देते हैं,क्योंकि गांव अगर स्वच्छ रहेगा तभी गांव के लोग सभी नागरिक स्वस्थ रहेंगे इसलिए जैसे-जैसे विकास होते गया गांव में सभी क्षेत्रों में विकास हो इसके लिए कई प्रकार की व्यवस्था की जा रही हैं,लोगों को 21वीं सदी से पहले की तरह कोई समस्या ना हो इसके लिए उन सभी व्यवस्थाओं को गांव में ही अच्छे तरीके से व्यवस्थित किया जा रहा है। जिसका लाभ आज हमारे ग्रामीण क्षेत्र के लोग ले रहे हैं, कई जगह तो ऐसा है अपने आसपास और अपने गांव को स्वच्छ रखने के लिए स्वयं ही प्रयास कर रहे हैं|

ताकि लोग स्वस्थ रह सकें ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अपने आसपास वातावरण को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले प्रयास कर रही हैं,और कई प्रकार की योजनाओं से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति और ग्राम स्तर में सुधार ला रही हैं,स्वयं के प्रयत्नों द्वारा गांव को स्वच्छ रखने का प्रयास कर रही हैं,जैसे शिक्षा के स्तर को विशेष महत्व देकर नए-नए तरीकों के साथ शिक्षा स्तर सुधारने का प्रयास किया गया उसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में गांव से जुड़े हुए हर उन विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है गांव को स्वस्थ रखने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं।

गांव में स्वच्छता बनी रहे इसके लिए स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गांव के हर घर के कचरे कूड़े को टिन से बने हुए कूड़ेदान का प्रयोग कर सभी कचरे को एक दिन उस कूड़ेदान में इकट्ठा कर साइकिल के माध्यम से गांव के बाहर बनाए हुए कूड़ेदान पर ले जाया जाता है,और ऐसा इसलिए किया जाता है,क्योंकि ताकि हर घर से निकलने वाले सभी प्लास्टिक कूड़े कचरे हो या किसी भी प्रकार के कचड़े हो वह गांव में इधर उधर ना फैले और गांव की स्वच्छता बनी रहे गांव के हर छोटे त्यौहार में लोगों द्वारा अपने आसपास को स्वच्छ रखने के लिए साफ सफाई कर घास को इकट्ठा करते हैं,और सूखने से पहले उसे कूड़ेदान में ले जाकर डाल देते हैं,गांव को स्वस्थ रखने के लिए इस प्रकार की व्यवस्था है लोगों को भी इस प्रकार की सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए अपने घर को अपने आसपास को स्वच्छ रखने में स्वयं की सहायता करनी चाहिए कई जगह तो ऐसा है,कि आज भी लोगों में जागरूकता की कमी हैलोगों को आपने देखा होगा किसी प्रकार के प्लास्टिक या कचरे को किसी भी स्थान पर फेंक देते हैं लेकिन उस से होने वाले नुकसान का उनको बिल्कुल भी आभास नहीं होता तो लोगों को उनसे होने वाले समस्याओं के बारे में जागरूक करना बहुत जरूरी है।

श्रीमती तिलकुंवर उम्र 35 वर्ष ग्राम पंचायत बिंझरा जिला कोरबा छत्तीसगढ़ के निवासी है,इनका कहना है,कि हमारे ग्रामीण क्षेत्र के हर चौराहे पर ईट से बने हुए कूड़ेदान बनाए गए हैं,जिसका प्रयोग ग्रामीण क्षेत्रों के लोग करते हैं,घर में जमा कूड़े कचरे को कूड़ेदान पर ले जाकर इकट्ठा करते हैं,हम स्वयं ही अपने घर से कूड़े कचरे को कूड़ेदान पर ले जाकर रखते हैं,ताकि हमारे घर और हमारे घर के आस-पास चारों वातावरण साफ-सुथरे रहे और किसी प्रकार की बीमारी ना हो तो इसलिए हम अपने घर और आसपास के वातावरण को अधिक से अधिक साफ सुथरा रखने का प्रयास करते हैं, क्योंकि कुछ समय पहले आसपास सफाई ना होने से मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियां हमारे गांव में फैलने लगी कहीं पर लोग प्लास्टिक या किसी भी प्रकार के कचरे को फेंक देते थे जिससे पानी जमा होने के कारण कई प्रकार के कीड़े मकोड़े उत्पन्न होने लगे थे और विभिन्न प्रकार की बीमारियों का कारण बनते थे जिसकी वजह से इन सभी बातों को ध्यान में रखकर इस प्रकार की योजनाएं तैयार की गई जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियां ना हो और लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहे हमारे गांव के महिला समूह की महिलाओं द्वारा हर मोहल्ले में जाकर कचड़े इकट्ठे किए जाते हैं,और उन्हें कंपोस्ट करने के लिए कूड़ेदान पर ले जाकर रख देते हैं,इस प्रकार से लोगों के घर और आसपास के जगह साफ-सुथरी हो जाती हैं,हम हर छोटे से छोटे त्यौहार में अपने गलियों की सफाई करते हैं जिसमें घास फूस कागज प्लास्टिक इस प्रकार के कचड़े होते हैं,उन्हें इकट्ठा करते हैं और कूड़ेदान पर ले जाकर रखते हैं,जब हमारे गांव में कचरा रखने के लिए कूड़ेदान नहीं बनाए गए थे तब गांव के नाले में कचरे को ले जाकर डाल देते थे जिससे नाले का पानी और आसपास की जगह खराब होने लगे थे नाले के पानी का प्रयोग गांव के लोगों द्वारा नहाने कपड़ा धोने के लिए किया जाता है लेकिन नाले में कूड़े कचरे डालने की वजह से नाले का पानी खराब होने लगा था लेकिन अब ऐसा नहीं होता क्योंकि गांव से बाहर जगह-जगह पर कूड़ेदान बनाए गए हैं,वहां महिलाएं कचरे कूड़े को ले जाकर इकट्ठा करती हैं।


इस प्रकार की व्यवस्था सभी जगह होनी चाहिए ताकि लोग अपने आसपास अपने गांव को स्वस्थ रख सके और किसी भी प्रकार की बीमारियों को पनपने से बचाया जा सके लेकिन गांव में अभी भी मैंने ऐसा देखा है,कि कई लोग इस कूड़ेदान का प्रयोग नहीं करते उनके घर के आस-पास होने के बावजूद वह घर के कचरे को ऐसे ही फेंक देते हैं,जबकि उनके घर के ही पास कूड़ेदान होने से उनको कचरा डालने में आसानी होती लोगों को अपने आसपास को साफ सुथरा रखने में स्वयं की जिम्मेदारी समझनी चाहिए और अन्य लोगों को भी जागरूक करना चाहिए शहरों में तो गली मोहल्ले और सड़क को साफ सुथरा रखने के लिए कई लोगों की नियुक्ति की जाती है,और उन्हें वेतन भी दिया जाता है,लेकिन गांव में ऐसी व्यवस्था नहीं होती लोग स्वयं ही अपने घर के आस-पास को साफ सुथरा रखने की कोशिश करते हैं।



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