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जानिये कैसे गर्मियों के दिनों में छत्तीसगढ़ के आदिवासी रबी फसल का उत्पादन करते हैं

गांव के लोगों के पास पर्याप्त मात्रा में भोजन न होने के कारण वो अपनी भोजन की पूर्ति के लिए बहुत मेहनत करके रबी फसल का उत्पादन करते है ।

रबी फसलें ठंड की शुरुआत में लगायी जाती हैं और वसंत ऋतु में तैयार होती है

ग्राम पंचायत बांझीबन के आश्रित ग्राम सिरकी कला के समायन सिंह कंवर बताते हैं कि अक्टूबर का महीना बीजों की बुवाई का समय होता है जबकि फसलों की कटाई मार्च एवं अप्रैल माह में की जाती है। इस दौरान फसलों को सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है। इन फसलों को कम नमी और शांत वातावरण चाहिए होता है। उनके पास साल भर के लिये पर्याप्त मात्रा में भोजन ना होने के कारण दल दल और घास से भरे खेतो में काम करना पड़ता है जिसकी सफाई और जुताई के लिए बैल का उपयोग नहीं कर सकते। पैसे की कमी के कारण वे घास की सफाई के लिये बनिहार भी नहीं रख सकते और उनको अपने खेतों की सफाई खुद अपने हाथों से करनी पड़ती है। एक बार यदि हाथों से साफ हो जाए तो दुबारा जोताई करने की जरूरत नही पड़ती है।

श्रीमती धन कुँवर

इसी गाँव में श्रीमती धन कुँवर भी रहती हैं जिनकी उम्र लगभग 45 वर्ष है। वे बताती हैं कि वे सर्दी के मौसम में अपने खेत में रोपा निदाई का काम करती हैं। हम धन कुँवर के खेत को गए। वहां हमने देखा की उनके साथ शीतल कंवर, जिनकी उम्र 23 वर्ष है, रोपा लगाने का काम कर रही थी । उनके साथ दो तीन साथियां और भी थी जो काम में सहयोग कर रही थी । ये सारे लोग इस काम को करने के लिए सुबह 9 बजे जाते हैं और शाम के ४-5 बजे तक काम करते हैं। उनके साथियों की मजदूरी 150 रुपये प्रति दिन है। वो बताती हैं कि उनके खेतों में बरसात के दिनों में धान की फसल नहीं हो पाती क्योंकि बारिश ज्यादा होने के कारण उनके खेतों में पानी की मात्रा ज्यादा हो जाती है और फसल डूब जाता है। जिसके कारण उनके पास पर्याप्त मात्रा में भोजन की व्यवस्था नहीं हो पाती। उनके पास आय का कोई और साधन नहीं होने के कारण उन्हें हमेशा पैसों की कमी रहती है । कभी-कभार जब उनके गांव में रोजगार गारंटी का कार्य चलता है तब उनको रोजगार मिल पाता है। इसके अलावा वे कभी-कभी गांव से बाहर मजदूरी करने जाते हैं जिससे उनका जीवन यापन होता है।


फसल की सुरक्षा

उन्होंने बताया की वे फसल की सुरक्षा के लिए बहुत सारी किट नाशक दवाई जैसे उसीडीन ,कीटनाशक 555 इत्यादि का उपयोग करते है । रोपा लगाने से पहले डी ए पी का प्रयोग करते है जिससे रोपा को जल्दी से जड़ पकड़ने में सहायता मिलती है और अच्छी उपज होती है।जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिये जंगल से छोटी छोटी झाड़ और कांटे वाली झाड़ को लाकर खेत के चारो ओर लगाते है ताकि उनके फसल को नुकसान न पहुँचे। हालांकि जंगल से झाड़ इकट्ठा करने पर फॉरेस्ट विभाग वाले डांटते है।

छत्तीसगढ़ के कुछ गाँवों में रबी फसल ज्यादा उगाया जाता है

रबी फसल का फ़ायदा

इस साल भी रबी सीजन में रिकॉर्ड उत्पादन देखने को मिल सकता है। मौजूदा ठंड और बारिश रबी फसलों के लिए काफी फायदेमंद है। मौजूदा बारिश का असर प्रमुख अनाज उत्पादक क्षेत्रों में खासतौर से अनाज ,गेहूं, तिलहन और दालों के लिए रामबाण है। इससे फसलों की पैदावार बढ़ने की उम्मीद है।


आइये जाने खरीफ फसल और रबी फसल में अंतर क्या है

फसलों को उनकी उपज के समय के हिसाब से दो प्रकार में बांटा गया है। कुछ फसलें बरसात के मौसम में होती हैं तो कुछ फसलें ठंड के मौसम में पैदा होती हैं। फसलों के मुख्य रूप से ये दो प्रकार हैं- खरीफ और रबी। जहाँ खरीफ फसल मॉनसूनी फसल होती है अर्थात ये फसलें मानसून के शुरू होने से लेकर मानसून के समाप्त होने तक तैयार होती हैं। वहीं रबी फसलें ठंड की शुरुआत में लगायी जाती हैं और वसंत ऋतु में तैयार होती है। खरीफ और रबी दोनों फसलें अपनी कुछ विशेष योग्यता की वजह से एक दूसरे से काफी अलग होती हैं।


रबी फसल का उत्पादन करने में कम समय लगता है और पानी भी कम लगता है । जिससे किसानों को खेती करने में सरलता होती है। और अच्छी फसल भी हो जाती है जिससे किसान अपना जीवन यापन कर सकते हैं।


यह लेख Adiwasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है और इसमें Prayog Samaj Sevi Sanstha और Misereor का सहयोग है l


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