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क्या नल जल योजना से ग्रामीणों के पानी की समस्या दूर हो रही है ?

अक्सर देखा जाता है शहर के अपेक्षा गाँव में जल की समस्या अधिक होती है। यदि सही सुविधा न हो तो गाँव वालों को अनेकों समस्या का सामना करना पड़ता है, न तो उन्हें स्वच्छ पानी मिल पाता है और अगर मिले भी तो बहुत दूर से लाना पड़ता है।


ग्राम पंचायत बांझीबन के सिरकी कला के रहने वाले 90 वर्षीय बिपत कुँवर कंवर जी बताते हैं कि "आज से 60-70 साल पहले हमें काफ़ी दिनों तक जल की समस्या से जूझना पड़ा। हमारा गाँव पहाड़ी के नीचे बसा हुआ है, जिस कारण हमारे गाँव में दो पहिया या चार पहिया वाहन आने-जाने के लिये कोई रास्ता नहीं था। यहाँ लोग सिर्फ़ पैदल चलकर ही आना-जाना करते थे। लोग यहाँ रहना तो शुरू कर दिए थे लेकिन खाने-पीने के लिये सही ढंग से पानी की सुविधा नही थी। यहाँ सिर्फ़ एक छोटी सी डबरी थी और उसी डबरी से पूरा गाँव पानी लिया करता था। यह डबरी भी गाँव से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर ही था। दूर होने के साथ इस डबरी की समस्या यह भी थी कि बरसात के दिनों में कूड़ा करकट से गंदा पानी बहकर उसमें भर जाता था। कभी-कभी अधिक बरसात होने के वजह से एक सप्ताह तक बाढ़ का पानी पूरी तरह से भरा रहता था ऐसी स्थिति वहाँ के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कुछ सालों बाद 2 हैंडपम्प लगाए गए, लेकिन थोड़ी ही दिनों में एक हैंडपम्प खराब हो गया और मात्र एक से ही पानी निकलता था, जिसके कारण उसमें से पानी लेने के लिए लंबी लाइन लगी रही थी। पानी की किल्लत इतनी अधिक थी कि ग्रामीण सिर्फ़ एक वक़्त का ही खाना बना पाते थे।"

गाँव में लगी सोलर द्वारा संचालित पानी की टंकी

लगभग 40-50 साल बाद अब यही गाँव सिरकी कला में आंगन बड़ी और स्कूल के साथ साथ गाँव के हर घर में नल-जल योजना के तहत सभी मोहल्लों के लगभग सभी घरों में नल कनेक्शन के द्वारा जल पहुँचाया जा रहा है अब यहाँ के लोगों के लिए 100% जल की व्यवस्था है जल से संबंधित अब किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं है। पर्याप्त पानी की व्यवस्था हो जाने से अब लोगों को घर पर ही साफ़ पानी मिलने लगा है, अपने रोज़मर्रा की जीवनचर्या के साथ-साथ अपने बाड़ियों में सब्जी आदि का फसल भी लगाया जा सकता है।


सरकार ने जल जीवन मिशन और हर घर जल योजना का एलान 2020-21 के बजट में किया था। इसका मकसद देश के सभी घरों में पाइपलाइन के द्वारा साफ़ पानी पहुंचाना है, यह लक्ष्‍य पूरा करने के लिए 2024 तक का समय तय किया गया है। सरकार इस योजना पर 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी।


नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।

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