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साल की लकड़ी से बने फर्नीचर तो देखे होंगे लेकिन इस पेड़ की एक और खूबी के बारे में आप नहीं जानते

आदिवासियों के गाँव अक्सर जंगल और पहाड़ के बीच बसा होता है। प्रकृति से यह निकटता उन्हें वन के वृक्षों और पौधों का अच्छा ज्ञान देती है। इस ज्ञान के सहारे अनेक आदिवासी वनोपज बेचकर जीविकोपार्जन करते हैं। आज हम बात करेंगे जंगल के एक पेड़ के बारे में जिसका नाम है साल वृक्ष। इस पेड़ की बानी वस्तुवें जैसे कुर्सी, टेबल, या खिड़की बहुत लोकप्रिय है। साल वृक्ष ज्यादा तर अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है। लेकिन जंगल के पास रहने वाले आदिवासी जानते हैं कि इसके बीज भी बहुत उपयोगी होते हैं। स्वस्थ तेल के लिए साल के बीजों को संसाधित किया जा सकता है। बीज और पट्टियां लोगों को हर साल आमदनी प्रदान करती है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में साल के वृक्ष अधिक होने के कारण उसके बीज भी बहुत ज्यादा मात्रा में उपलब्ध होती है।

साल के पेड़ पर खिले फूल I Credit: J. M. Garg (Wikipedia

साल पेड़ की बनावट : साल के पेंड़ मोटे तथा लंबे होते हैं अर्थात इमारती लकड़ी में गिनी जाती है। इस वृक्ष की लंबाई लगभग 20 मीटर से 30 मीटर तक होती है । साल बीज को शासन प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत वन समिति को खरीदने का अधिकार दिया गया है। वन मंण्डल समिति आदिवासियों से 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बीज खरीदती है।


छत्तीसगढ़ राज्य के गरियाबंद जिला के आश्रित, ग्राम विजय नगर हरदी से ,श्री- संजय कुमार (उम्र 35 वर्ष) ने बताया कि, गरियाबंद जिला के विभिन्न अंचलों में साल के घने जंगल में मोटे लम्बे साल वृक्ष अधिक मात्रा में पाई जाती है। इससे ग्रामीणों को एक माह के लिए रोजगार प्राप्त होता है। अर्थात इसके लकड़ी से लेकर पत्ता ,जड़ तक सभी उपयोगी है । संजय जी ने यह भी बताया कि साल के बीज इकट्ठा करने के लिए घर से सुबह 7.00 बजे लोग तिलईदादर जंगल जाते हैं। "घने जंगल को देख कर मन मोहीत हो जाता है । जंगल की ठंठी- ठंठी हवा, वहां की वातावरण एवं वृक्षों की छांव में घुम घुम कर साल बीज इक्कठा में मुझे बहुंत प्रसन्ना मिलती है।"

संजय जी आगे बताते हैं की इकठ्ठा किया गया बीज को साफ जगह में रख कर धुप में सुखाया जाता है। बाद में बीच की पंखुड़ी को जलाया जाता है। इस काम में एक लम्बे डांग की जरुरत पड़ती है, जो बीज की पंखुडी को फैलाने मे काम आती ह। साल के बीज को जलाने के बाद थोड़ी देर उसे ठंडा होने दिया जाता है। जल जाने के बाद, बीज को हाथ से रगड़ कर सुपा से साफ किया जाता है।


कई गाँवों में, जहां पक्की रोड की सुविधा है, वहां लोग साल बीज को रोड़ में बिछा देते हैं। उसके ऊपर गाड़ी चलने से बीज फूट जाता है,और फिर उसे सपा के माध्यम से साफ कर दिया जाता हैं। साफ करने के बाद साल के बीजों को दुकान मे 15 ₹ में या सहकारी समिति में 20 ₹ किलो में बेच देते हैं। एक दिन में आदिवासी लोग कम से कम 20 kg तक के साल बीज इकट्ठा कर लेते हैं। इसका मतलब, मेहनत करने वाले लोग, 400, 500 तक 1 दिन में कमा सकते हैं । साफ किए गए साल बीज को सराई दाल कहते हैं।


एक और व्यक्ति हैं, उमेश बाई, जिन्होंने बताया कि साल बीज को पहले केवल 7-8 रुपया प्रति किलो में बेचा जाता था। अब इसकी बीज की मुल्य में वृद्धि होने के कारण ग्रामिणो को बहुत लाभ मिल जाता है। "ग्रामीणो के लिए एक माह की रोजगार प्राप्त होती है और लोग अपने घर खर्च चला लेते हैं।"


साल वृक्ष के उपयोग : भुंजिया जाती के श्री साधु राम जी ने हमें साल पेड़ की विशेषताओं के बारे में बताया

1. साल के पत्तों से पतरी या पत्तल बनाया जाता है। शादी-विवाह एवं सामाजिक कार्यक्रम में खाना खाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। अर्थात पत्तल बनाकर इसे बेंच सकते हैं , जो शुद्ध प्राकृतिक होने के कारण किसी भी रूप में प्रदुषण नहीं फैलाता है।

2. हमारे छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का मानना है, सरई अर्थात साल वृक्ष चंदन वृक्ष से भी ज्यादा पवित्र है। आदिवासी समुदाय के लोग साल वृक्ष से धुप इकठ्ठा करते हैं और देवी-देवताओं के पूजा-पाठ में जलाने के लिए उपयोग करते हैं ।

3.साल वृक्ष की लकड़ी को आग जलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है । इसके अलावा, इमारती लकड़ी होने के कारण कई सुंदर वस्तु बनाई जाती है जैसे - कुर्सी, टेबल, खिड़की, दरवाजा तथा घर । साल वृक्ष कठोर होने के कारण इसकी वस्तु लम्बे समय तक टीकाऊ रहती है।

4.आदिवासी लोग साल के बीज को मौंहा के साथ में भुंजी बनाते थे जो सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

क्या आपने कभी साल के पत्तों से बने पत्तल पे खाना खाया है? अपना अनुभव कमरे साथ शेयर करें।


नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।

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