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“जन गण का नारा है, पोलियो दवा पिलाना है”- छत्तीसगढ़ के गाँव में पोलियो टीकाकरण का अभियान

“दो बूँद ज़िंदगी के”


इस नारे के साथ देश को पोलियो की टिका लेने के लिए प्रोत्साहित कर अमिताभ बच्चन हमें TV और रेडीओ पर दिखते और सुनाई देते थे। भारत ने WHO या विश्व स्वास्थ्य संगठन वैशिवक पोलियो उन्मूलन प्रयास के परिणाम स्वरूप 1995 में पल्स पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम आरंभ किया गया। इस कार्यक्रम के तहत पाँच वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को पोलियो समाप्त होने तक, हर वर्ष दिसंबर और जनवरी में पोलियो टीके की दो खुराक दी जाती है। यदि किसी देश में लगातार तीन वर्षो तक एक भी पोलियो का मामला नहीं आया हो तो विश्व स्वस्थ्य संगठन, उसे पोलियो-मुक्त देश घोषित कर दे देता है। विश्व स्वस्थ्य संगठन के हिसाब से भारत को २०१४ से अब तक पोलियो-मुक्त देश माना जा चुका है। अतः यह अभियान सफल सिद्ध हुआ और हमारे नौनिहालों को पोलियो का शिकार नहीं होना पड़ेगा।

पोलियो टीकाकरण की सूचना


क्या है पोलियो?


पोलियो एक विषाणु जनित भीषण संक्रामक रोग है जो आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति मे संक्रमित विष्ठा या खाने के माध्यम से फैलता है। यह बीमारी बच्‍चें के किसी भी अंग को ज़िंदगी भर के लिये कमजोर कर देती है। बचाव ही इस बीमारी का एक मात्र उपाय है। यह रोग भारत से भले ही मिटाया गया हो, इस पोलियो- मुक्ति की स्थिति को बरकरार रखने के किए हर साल पोलियो का टीकाकरण अभी भी होता है।

स्कूल के बच्चों की रैली


“जन गण का नारा है, पोलियो दवा पिलाना है”


छत्तीसगढ़ के गाँव क्षेत्रों में पोलियो के टीकाकरण दिन से एक दिन पहले पूरे गाँव में गाँव के सरपंच, पंच मितानिन, शिक्षक और मुख्यतः स्कूलों के बच्चों द्वारा रैलियाँ निकाली जाती है। बच्चों के द्वारा नारे लगाए जाते हैं, ताकि सब को पता चल सके कि पल्स पोलियो का कार्यक्रम कब है। जब भी पल्स पोलियो का अभियान चले, तो इसमें घर -घर जा कर इसके बारे में जानकारी दी जानी चाहिए ताकि जो लोग गाँव क्षेत्रों में रहते हैं उनको यह जानकारी मिल सके और वह इसका फ़ायदा उठा सके।

पोलीयो टीकाकरण


इस साल भी जनवरी में इस कार्यक्रम को सरकारी भवनों में आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा किया गया। पोलियो मुक्त होने के बावजूद भारतीय नीति निर्माताओं द्वारा पोलियो पर इतना ध्यान दिया जाता है, क्योंकि पोलियो वायरस के भारत में वापस आने का खतरा है। इस साल पोलियो टीकाकरण में कोरोना वाइरस के वजह से बाधा आई है। सरकार को लॉकडाउन खतम होने के बाद इस अभियान को तेज गति से पूर्ण करना चाहिए।


लेखक के बारे में- राकेश नागदेव छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करते हैं। यह खुद की दुकान भी चलाते हैं। इन्हें लोगों के साथ मिलजुल कर रहना पसंद है और यह लोगों को अपने काम और कार्य से खुश करना चाहते हैं। इन्हें गाने का और जंगलों में प्रकृति के बीच समय बिताने का बहुत शौक है।


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

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