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मछली से बनाते है त्रिपुरा के आदिवासी ये मनपसंद खाना

भारत के कई राज्यों में मछली खाने के एक अहम भाग है, इन राज्यों में से एक है त्रिपुरा।मछली त्रिपुरा के कई मज़ेदार और स्वादिष्ट रेसिपीज़ का भाग है और लोग इसे बड़े उत्साह से पकाते और खाते है। इन बढ़िया रेसिपीज़ में से एक है इसका नाम है आ पेकंजाक (कोकबोरोक-A. pengjak)।


आ पेकंजाक बनाने की विधि

इस पकवान की मछली बाजार में आसानी से उपलब्ध है। मछली को घर लाने के बाद, इसे पहले अच्छे से धो लेते है, जिसके बाद मछली, और हल्दी लेकर अच्छे से मिक्स कर लेते है। इसमें फिर प्यास और मिर्ची भी डाली जाती है, और इस मिश्रण को मिलाया जाता है। अगला कदम है हल्दी के पत्तों को पानी से साफ करना और मछली के मिश्रण को पत्तों से लपेट लेना। हल्दी के पत्तों को थोड़ा दबाया जाता है, और उसके बाद पत्तों के एक किनारे को चीरकर पत्ते को जैसे रस्सी से बांध लेना है।

अगला कदम है इसे पकाना! २० से ३० मिनट तक इसे ठीक से पकाया जाता है, जब तक हल्दी के पत्तों का रंग कला- भूरा ना हो जाए। पकाने के बाद ५-१० मिनट तक इसे थाली में रखा जाता है, जिसके बाद हल्दी के पत्तों को खोला जाता है। यह तैयार है त्रिपुरा के आदिवासियों का मनपसंद A Pengjak!


त्रिपुरा के आदिवासी गाँव में बहुत सारे पकवानों को बनाने के लिए किसी प्रकार के मसाले या तेल का उपयोग नहीं होता है, जैसे इस पकवान में भी नहीं हुआ। फिर भी, याक बहुत स्वादिष्ट है और इस पकवान को किसी भी छोटी या बड़ी मछली से, जो आपके यहाँ उपलब्ध है, बनाया जा सकता है!


लेखक के बारे में- यापरी देव बर्मा त्रिपुरा के निवासी है।


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

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