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मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है त्रिपुरा आदिवासियों का व्यंजन “कोइचा”

आदिवासी पाक कला में सामान्यतः पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग होता है। इसी कड़ी में एक कोइचा नाम का सामिष (नॉन-वेजीटेरियन) व्यंजन आता है। यह हाथ से बने मिट्टी के बड़े घड़े जैसे बर्तन में बनाया जाता है। कोकबोरोक (Kokborok) भाषा में में इसे हानि त्व्क “Hani Twk” कहते हैं। हा (Ha) का मतलब है मिट्टी और त्व्क (Twk) का मतलब है बर्तन। इस बर्तन को जिस वस्तु पर रखा गया है उसे हातराह (Hatrai) कहते हैं। यह बांस से बनाया जाता है। इस पर लगने वाला ढक्कन सोरोक (Sorok) कहलाता है। इस बर्तन का एक अन्य नाम डेक (Dek) भी है। पर अमूमन कोकरोबोक भाषा में हानि त्व्क (Hani Twk) ही ज़्यादा बोला जाता है।

Hani twk/मिट्टी का बनाया हुआ बर्तन


आज कोइचा बनाने के लिए अलग बर्तन का प्रयोग भी कर लिए जाता है। परन्तु पुराने दिनों में सिर्फ़ मिट्टी के बर्तन में ही खाना बनाने का चलन था। कहा जाता है की मिट्टी का बर्तन में बनाए हुए खाने का स्वाद ही कुछ और होता है। ऐसा सुस्वादु खाना कोइचा को किसी और तरह के बर्तन में बनाने से नहीं आ पाता। आइए अब आपको बताते हैं कोइचा कैसे बनाया जाता है।


सबसे पहले कोइचा बनाने के लिए मसाला तैयार किया जाता है। इसके लिए प्याज़, टमाटर काटकर इसमें लाल मिर्च, अदरक,प्रसन्न, प्याज़, लहसुन, जीरा पाउडर, लॉन्ग (long) और मेथी दाना मिलाया जाता है। अब इसका पेस्ट बना के केले के पत्ते पर अलग रख लिया जाता है।

खाना बनाने के लिए मसाला तैयार करने कि सामग्री


कोइचा खेतों के आसपास जमा पानी में पाया जाने वाला एक सांप जैसा दिखने वाला जीव है। त्रिपुरा के आदिवासी बहुत ही मेहनत से इसको पकड़ पाते हैं। वे लोग या तो कोइचा को बेच कर कुछ पैसे कमा लेते हैं अथवा इसे घर लाकर पकाकर खा लेते हैं।


पकाने से पहले कोइचा की ऊपरी त्वचा हटाई जाती है। फिर इसके बराबर से छोटे छोटे टुकड़े कर के इसमें पहले बनाया गया मसाला और तेल डालकर सब कुछ हाथों से मिलाया जाता है।

आगके चले में रखकर पकाया हुआ।


अब ये मिश्रण मिट्टी के बर्तन में डालकर चूल्हे पर रख देना है। यह चूल्हा लकड़ियां जला कर बनाया जाता है और पारंपरिक रूप से खाना इस ही पर बनाया जाता रहा है। कोइचा को तीस मिनट धीमी आंच पर पकने दें। फिर ढक्कन हटा कर हिला कर देखें की पूरी तरह से पाक गया है या नहीं। अगर पकने में कसर बाकी लगे तो थोड़ा और पकने दें। अगर आपको लगे की कोइचा बहुत ज़्यादा सूख गया है पर ठीक से गला नहीं है तो आधा से एक गिलास पानी डाल कर इसे फिर पकने रख दें। पंद्रह मिनट बाद इसे चूल्हे से उतार लें। याद रखिये कोइचा न बहुत अधिक सूखा होता है न बहुत ही रसेदार।

पकने के बाद कोइचा ऐसा दिखता है


फ़ोटो देखकर आप समझ ही गए होंगे की कोइचा खाने में कितना स्वादिष्ट लगता है। तो देर किस बात की? आप भी अपने घर पर कोइचा बना कर खाइये और हमें बताइये आपको त्रिपुरा के आदिवासियों का पारंपरिक खाना कैसा लगा।


About the author: Khumtia Debbarma is a resident of the Sepahijala district of Tripura. She has completed her graduation and wants to become a social worker. She spends her free time singing, dancing, travelling and learning how to edit videos.


यह लेख पहली बार यूथ की आवाज़ पर प्रकाशित हुआ था

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