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जिला प्रशासन ने दिया संडे लॉकडाउन पर कुछ छूट, ग्रामीण लोगों ने ली राहत की सांस

कोरोना वायरस के बढ़ने से पूरे देश मे तालाबंदी लगाया गया था, लेकिन अब धीरे धीरे यह बीमारी लगातार कम हो रही है जिसके कारण लॉकडाउन हटाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा जिले में बहुत तेजी से कोरोना वायरस में कमी को देखा गया है इसलिए रविवार को छोड़ कर बाकी सभी दिनों में तालाबंदी हटा दिया गया था। फिर अब जिले की अच्छी स्थति को देखते हुए संडे लॉकडाउन में भी छूट दे दी गयी है। कोरबा जिले में रविवार को दोपहर 2 बजे तक सभी दुकाने खुली रहेंगी और उसके बाद सम्पूर्ण लॉकडाउन रहेगा।

कई लोग रविवार को खरीदारी करते हैं क्योंकि यह छुट्टी का दिन है

कोरबा जिले में कोरोना की दूसरी लहर थमती जा रही है। नवभारत टाइम्स के अनुसार जिला प्रशासन के प्रयास से संक्रमितों की संख्या में गिरावट होने के साथ रिकवरी रेट भी बढ़ा है । परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने रविवार लॉक डाउन में कुछ नियमो के साथ छूट दे दी है। संडे को दोपहर दो बजे तक संस्थान खोले जा सकेंगे । इस अवधि में जरूरी सेवा शामिल सेवाओं को ही अनुमति दी गयी है समय की अवधि में शासकीय उचित मूल्य की दुकानें, एलपीजी गैस न्यूज़पेपर ,दुग्ध,फल,सब्जी,केवल विवाह प्रयोजन हेतु मैरिज हॉल, होटल रेस्टोरेंट तथा अनुमति प्राप्त अन्य सेवाओं के होम डिलीवरी संचालन की अनुमति होगी।सार्वजनिक सड़को पर बैंड नही बजेंगे नियत स्थान पर ही रात्रि 10 बजे तक के लिए अनुमति दी गयी है ।


ऐसे ही जब मैंने झोरा गांव के दुकानदारों से पूछा कि इस संडे लॉक डाउन में आपके दुकान और आपके परिवार पर क्या प्रभाव पड़ा ,तो उन्होंने बताया कि सप्ताह के इसी दिन प्रत्येक संडे को उनकी दुकाने सबसे ज्यादा चलती है क्योंकि उनके दुकान झोराघाट पिकनिक स्पॉट वाले रास्ते में है। प्रत्येक संडे को यहाँ अधिक संख्या में पर्यटक आते है। संडे का दिन सरकारी छुट्टी होने के कारण यहाँ भारी भीड़ रहती है और पर्यटक उनके दुकान से सामान की खरीदी करते हैं। दुकानदार कहते है कि पूरे सप्ताह में उनकी जितनी कमाई होती है उतनी कमाई वे संडे को एक दिन में कर लेते है, इसलिए इस दिन दुकाने बंद होने से ये चिन्ता का विषय बन गया था।


इसी तरह से झोरा गांव में एक महतो समाज का परिवार निवास करता है जो अत्यंत गरीब परिवार के लोग हैं। वे कहते हैं, "हम रोज बांस (बम्बू) से सूपा टुकनी जैसे चीजो को बेच कर ही खाने के लिए राशन का जुगाड़ कर पाते है। हमारे पास इतना पैसा नही है कि हम एक सप्ताह के लिए राशन रख सके तो सीमित मात्रा में ही पैसे के हिसाब से रासन लेते है। हमारा रासन शनिवार शाम तक खत्म हो जाता था तो रविवार के दिन हमे बहुत दिक्कत होता है। हम तालाबंदी खोलना का स्वागत करते हैं।"


आगे समय बढ़ने की उम्मीद


जिस तरह से कोरबा जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या कम हो रही है इसी के साथ कोरबा कोरोना मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ा है।अगर जिले की स्थति ठीक ठाक रही तो व्यवसाय संचालन में व्यवसायियों को उम्मीद है कि उन्हें रात्रि दस बजे तक व्यवसाय संचालन की अनुमति मिल सकती है।


नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।

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