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रसोई गैस की बढ़ती कीमत की वजह से गाँवों में लोगों को हो रही सिलेंडर भराने में मुश्किल

शिवम जोशी द्वारा संपादित


आप सभी को पता है की हमारे भारत में लोगों के कल्याण के लिए कई योजनाएं और प्रावधान तैयार किए गए हैं। उनमें से कुछ योजनाएं महिलाओं के लिए, कुछ बच्चों के लिए और कुछ पुरुषों के लिए बनाए गए हैं। हमारे छत्तीसगढ़ में भी ऐसे कई प्रकार की योजनाएं तैयार कर लागु की जाती हैं, जिसका लाभ अधिकतर हमारे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आर्थिक और सामाजिक तौर पर आगे लाने के लिए और उन्हें बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।

महिलाओं के कल्याण के लिए और उन्हें आगे लाने के लिए, जन्म से लेकर उनके शादी-ब्याह तक के लिए कई ऐसी योजनाएं लागू की गई है जिसका लाभ वह ले सकती हैं। जैसे, शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाओं को प्रोत्साहित देने के लिए स्कॉलरशिप का प्रावधान और सरस्वती साइकिल वितरण योजना। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्हें बैंकों द्वारा लोन भी प्रदान किया जाता है। कुछ इसी तरह हमारे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक योजना लागु की गयी है,"उज्ज्वला योजना " जिसके तहत महिलाओं को गैस चूल्हा का वितरण किया गया है। लेकिन, आज जब रसोई गैस की कीमतों में दिन बा दिन वृद्धि हो रही है, हमें यह पूछना पड़ रहा है , "क्या उज्ज्वला योजना महिलाओं की मदद कर रही है? क्या वे अपने रसोई घर के सिलेंडरों को भरने में सक्षम हैं? क्या वे गैस स्टोव का उपयोग कर पा रहे हैं? क्या वे आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं?"


स्वच्छ इंधन और बेहतर जीवन के बारे में सोचते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 1 मई सन 2016 को एक सामाजिक कल्याण योजना 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' की शुरुआत की। इस योजना के तहत लगभग पांच करोड़ परिवार, विशेषकर गरीबी रेखा से नीचे रह रही महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य धुआं रहित ग्रामीण भारत बनाना, स्वास्थ्य संबंधित विकार दूर करना, वायु प्रदूषण एवं वनों की कटाई को कम करने का था। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, खाना पकाने के लिए एक स्वस्थ इंधन का उपयोग करना, जीवाश्म ईंधन के उपयोग के कारण ग्रामीण आबादी के लाखों लोगों के बीच स्वास्थ्य से संबंधित खतरों को रोकना इस योजना का उद्देश्य था।


प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत वहीं महिलाएं पात्र हैं, जिनकी आयु 18 वर्ष से ऊपर हो एवं आवेदक एक बीपीएल कार्ड धारक ग्रामीण निवासी हो। साथ ही महिला आवेदक का सब्सिडी राशि प्राप्त करने के लिए किसी भी राष्ट्रीय कृत बैंक में बचत बैंक खाता हो। केवल वही ग्रामीण महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल सकता है जिनके घर में पहले से कोई भी एलपीजी कनेक्शन ना हो।


उज्जवला गैस का वितरण छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में बीपीएल कार्ड धारी ग्रामीण महिलाओं को किया गया। जब उज्जवला गैस कनेक्शन वितरण किया गया तब 1 महीने की गैस मुफ्त में मिली थी। लेकिन अब एलपीजी गैस की कीमत में लगातार तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है, जो की तालाबंदी से लेकर अब तक इस तरह बढ़ती जा रही है, कि अब रुकने का नाम नहीं ले रही। उज्जवला गैस प्राप्त करने वाली महिलाएं इस बढ़ती हुई एलपीजी की कीमत के कारण अपने घरों में गैस की भराई करवाने में स्वयं को असमर्थ पा रही हैं।


आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के उन उज्जवला गैस लाभार्थी महिलाओं से कि उनकी आर्थिक स्थिति पर इस बढ़ती हुई महंगाई के साथ एलपीजी गैस के बढ़ती कीमत का क्या असर हो रहा है।

श्रीमती तिल कुंवर

श्रीमती तिल कुंवर, ग्राम पंचायत बिंझारा (जिला कोरबा, छत्तीसगढ़) की निवासी बताती है कि उन्हें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत सन 2016 में गैस कनेक्शन प्राप्त हुआ। वह कहती है - "तब यह गैस और चूल्हा मुफ्त में प्रदान किया गया था। लेकिन जब से तालाबंदी हुआ है, तब से गैस की कीमत लगातार बढ़ती ही जा रही है। तालाबंदी के बाद गैस एजेंसी से सीधे हमारे घरों तक गैस पहुंचाया जाता है। हमने हाल ही में अपने घर में गैस लिया, तब उसकी कीमत ₹980 थी। ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीएल कार्ड धारी महिलाओं के लिए गैस कि भराई आसान नहीं है, क्योंकि इसकी कीमत हमारे मूलभूत आवश्यकताओं में से अधिक है, जिसका असर हमारे आर्थिक स्थिति पर पड़ रही है। इस बढ़ती हुई गैस की कीमत का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन पर पड़ रहा है।"

श्रीमती सविता बताती है कि इन्हें भी सन 2016 में ही उज्जवला योजना का लाभ प्राप्त हुआ। एलपीजी गैस प्राप्त होने के बाद इनके घर में अन्य ईंधन की बचत होने लगी जिससे वह बहुत खुश थी। वह कहती हैं - "लेकिन अब इस गैस की भराई बहुत मुश्किल से हो पाती है। क्योंकि इसकी कीमत पिछले वर्षो की तुलना में बढ़ चुकी है और हर दिन बढ़ती ही जा रही है। इस कारण हम गैस की भराई करने में असमर्थ हैं, क्योंकि तालाबंदी के बाद सभी चीजों की कीमत में वृद्धि हुई है।" इनका कहना है कि सभी वस्तुएं मुफ्त में प्राप्त हो ऐसा नहीं सोचते हैं, लेकिन दिन-ब-दिन सभी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होने से उनके जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।


यह लेख हमने बढ़ती हुई महंगाई को देखते हुए लिखा है। चूँकि लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक आवश्यकता इंधन अथार्थ एलपीजी गैस है, लेकिन इसकी कीमत आज सातवें आसमान को छू रही है। गैस कनेक्शन का लाभ ग्रामीण क्षेत्र की उज्जवला योजना लाभार्थी महिलाएं लेना चाहती हैं, लेकिन एलपीजी गैस की कीमत में बढ़ोतरी होने पर वह इस गैस का पूर्ण रूप से लाभ नहीं ले पा रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव होने लगा है।


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नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।


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