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गर्मी से राहत पाने के लिए छत्तीसगढ़ के आदिवासी एक स्वादिष्ट और ताज़गी भरा ठंडाई बनाते हैं

गर्मी के महीनों में जब तापमान बढ़ता है और लोग घर के अंदर छिपने को मजबूर हो जाते हैं, तब गाँववाले खुद को ठंडा रखने के लिए एक ताज़ा ठंडाई बनाते हैं। सबसे ज्यादा गर्मी जेठ के महीने में लगता है जब तापमान ४० डिग्री के ऊपर पहुंच जाता है। इस समय में बहुत ही ज्यादा गर्मी लगती है और गर्मी के वजह से कभी कभी तबीयत भी बिगड़ जाती है। गांव के लोग खुद को स्वस्थ रखने के लिए ठंडाई का प्रयोग करते है। यह ठंडाई गाँव में पाए जाने वाले बेल फल से बनाई जाती है। बेल की ठंडाई से गर्मी दूर होती है और शरीर भी स्वस्थ रहता है।

बेल फल गोल, चिकना और बड़ा होता है

कोरबा जिले के अन्तर्गत आने वाले ऐसे बहुत से गाँव है जहां के लोग गर्मी के दिनों में अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए ठंडाई बनाते रहते हैं। हमने बिंझरा गांव की 60 वर्षीय निवासी, करन बाई से बात की और जाना की गर्मी के मौसम में उनके गाँव के लोग कैसे गर्मी दूर करते हैं। उन्होंने हमे बताया की गर्मी बढ़ जाने पर गाँव के लोग बेल फल से बानी ठंडाई का सेवन करते हैं । बेल फल गाँव में आसानी से प्राप्त हो जाता हैं और इसके ठंडाई को पीने से स्वास्थ ठीक भी रहता है। बेल फल को बिल्व फल भी कहते हैं। इस फल को आप चम्मच के सहारे भी खा सकते हैं। यह बहुत ही मीठा होता है।

पुराने ज़माने से बेल भोजन के रूप में खाया जाता आ रहा है। पुराने ज़माने के लोग अपना पेट भरने के लिए कंदा, कुस्ली या फल का प्रयोग करते थे। लेकिन अब फलों का प्रयोग कई तरह से किया जाता है। फलों से जूस या मिठाई बनाई जाती है और कहीं-कहीं पर शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दवाई भी बनाई जाती है।


बेल फल के फायदे

  • बेल के फल को गांव में ज्यादा तर ठंडाई के रूप में ही सेवन किया जाता है। जबकि बेल में बहुत गुण होते हैं, ये माना जाता है की नई माओं के लिए ये फल बहुत फायदेमंद है।

  • गैस और कब्ज जैसी बीमारी भी कम होती हैं।

  • जब बच्चो को दस्त की सिकायत होती है तो बेल का जूस बनाकर पिलाया जाता है जिससे दस्त ठीक हो जाता है और शरीर को आराम मिलता है।

  • कभी कभी बेल के फल को आग में अच्छे से भून कर भी खाया जाता है। इस भुने हुए बेल का सेवन करने से कब्ज और कफ जैसे बीमारी को दूर करने में सहायता मिलती है।

कैसा दिखता है बेल का फल और उसका वृक्ष

बेल का वृक्ष जंगलों में और गांवों में किसी किसी के घरों में भी मिल जाता है। जो लोग बेल के फायदे के बारे में जानते है ,वे अपने घरों में ही बेल का वृक्ष लगवा लेते हैं। बेल के वृक्ष की लंबाई ५ से ७ मीटर होती है। बेल फल गोल, चिकना और बड़ा होता है। बेल पीले रंग का होता है और इसके ऊपर के छाल कठोर होती है। छाल को फोड़ने पर बेल का कठोर वाला भाग और रसीले वाला भाग अलग हो जाता है।


बेल फल से कैसे बनाते हैं ठंडाई

ठंडाई बनाने के लिए पके हुए बेल के फल का प्रयोग करे। पके हुए बेल को अच्छे से धोकर दो भागो में बाट ले। बेल की छाल कठोर होती है। यह फल नारियल जैसा होता है - बाहर से सख्त और अंदर से नर्म और रसीला। बेल का फल बहुत ही मीठा होता है इसलिए ठंडाई बनाने के लिए शक्कर की जरुरत नहीं होती।

बेल के गुदे को पानी में अच्छी तरह से घोल ले जिससे पानी और बेल अच्छी तरह से मिल जाए। जब बेल और पानी अच्छी तरह से मिल जाए इस घोल को गिलास में डाल ले। आपकी बेल ठंडाई तैयार है। इस तरह से गांवो में गर्मी के दिनों में जब नावतपा लगा होता है , बेल की ठंडाई का सेवन होता है। गांवो में बेल के फल का ही नहीं बल्कि बेल के पत्ते और बेल के जड़ों का भी प्रयोग कुछ न कुछ काम के लिए किया जाता है।


बेल की खेती करना

बेल का वानस्पतिक नाम Aegle marmelos है।

बेल की खेती करने के लिए दोमट मिट्टी या फुरफुरी मिट्टी में फसल लगाई जाती है। रेतीली मिट्टी में भी बेल की फसल लगाई जा सकती है। बेल की खेती करने के लिए ना ही ज्यादा गीली मिट्टी और ना ही ज्यादा सुखी मिट्टी की जरूरत होती है।


कोरबा जिला और बेल की खेती

कोरबा जिले में बेल की खेती नहीं की जाती लेकिन कोरबा जिले के अन्तर्गत आने वाले जंगलों में कहीं-कहीं पर बेल के फल पाए जाते हैं। कोरबा के आस-पास के क्षेत्रों में बेल की खेती की जाती है। बेल बीमारी से बचाने के लिए औषधि बनाने के काम आता है। बेल की छाल भी कई तरह से इस्तेमाल में लाइ जाती है। बेल का फल फरवरी से मार्च तक नारियल के सामान दीखता है और मई में यह फल पकना शुरू हो जाता है। बेल के पकने के बाद उसे तोड़ कर उपयोग में लाते है।


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नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।

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