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क्या है गरुड़ का फल और कैसे करता है यह हमारी सुरक्षा?

छत्तीसगढ़ की महिलाएँ बताती हैं कि उनके गांव में गरुड़ का पेड़ लगाया जाता है। गरुड़ का पेड़ गाँव के लगभग सभी घरो में उपलब्ध है। इस पेड़ का बीज बहुत ही फायदेमंद होता है। गरुड़ के पेड़ की लंबाई काफी छोटी होती है। यह एक कम झाड़ वाला पेड़ है। गरुड़ के पेड़ को आप बहुत ही आसानी से अपने घर के आसपास लगा सकते हैं। इस पेड़ में हरे रंग का फल आता है। फल की लंबाई लगभग 4 सेमी होती है। पकने के बाद हरा फल भूरे रंग में बदल जाता है। तब गरुड़ के फल को तोड़कर घरों में उपयोग में लाते हैं। जो पूरी तरह से सूखने के बाद बेहद उपयोगी हो जाता है।

घर से लगा हुआ गरुड़ का पेड़

इस पेड़ का फल काफी दिनों तक पेड़ में फला रहता है। ये फल अधिकतर गर्मी के दिनों में ही पक कर तैयार हो जाता है। पके हुए फल को तोड़कर घर ला कर दरवाजे के सामने या अपनी बाड़ी के दरवाजे के सामने या फिर प्रत्येक कमरे के सामने लगाया जाता है। इस पेड़ को लगाने के पीछे कारण यह है कि गरुड़ का फल घर को सुरक्षा देता है। हम जानते हैं कि बारिश के दिनों में अधिकतर गाँवों में सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जीव खेतों से निकल कर घर के आसपास आ जाते हैं। गांववाले मानते हैं की गरुड़ का पका फल इन जहरीले जीव-जंतुओं से बचाने में काम आता है। इस तरह से गरुड़ का फल हमारी सुरक्षा करता है।

श्रीमती पराना बाई दीवान जी

इनका नाम श्रीमती पराना बाई दीवान है जो ग्राम नावाडीह ब्लॉक बागबाहरा जिला महासमुंद, छत्तीसगढ़ की रहने वाली आदिवासी महिला हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने घर में गरुड़ का पेड़ लगाया है। इसके साथ-साथ उन्होंने अपने आसपास के घरों में भी गरुड़ का पेड़ लगाया है। ताकि समाज के अधिक से अधिक लोग इस उपयोगी फल का इस्तेमाल करके अपनी सुरक्षा कर सकें। इसके बीज को घर के सामने लगाया जाता है। उनका मानना है कि इस बीज को लगाने के बाद वे अपने घर को सुरक्षित महसूस करती हैं।


अगर आप भी इस गरुड़ के पके हुए फल का उपयोग करना चाहते हैं तो आप पराना बाई सिदार से संपर्क कर सकते हैं। अगर आप इसे अपने दरवाजे के सामने लगाएंगे तो जहरीले जीव-जंतु आपके घरों में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।


नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।

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