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क्यों सरगुजा संभाग के पण्डों आदिवासियों का अब जाकर हो रहा है सर्वेक्षण?

हमारे छत्तीसगढ़ राज्य में पण्डों जनजाति के लोग कोरिया, कोरबा, बिलासपुर, सरगुजा, रायगढ़, बलरामपुर, सुरजपुर जिलों में निवास कर रहे हैं।


कोरिया जिले में मंत्रालय (छ:ग) की ओर से हमारे पण्डों आदिवासियों के सर्वेक्षण कर उनकी सामाजिक-आर्थिक एवं परिस्थिति का परिक्षण और अध्ययन करने हेतु कुछ अधिकारियों को भेजा गया, जिसमें अधिकारियों ने दल-गठित कर पण्डों जनजाति के शत्-प्रतिशत परिवारों का सर्वेक्षण कार्य शुरू किया। उसी दौरान अधिकारियों ने हर ब्लॉक में एक-एक दिन का बैठक रखने को कहा जिससे सभी ब्लॉक के हर गांव में निवासरत पण्डों आदिवासी एक जगह चयनित करें जिसमें सभी लोग उस जगह पहुंच सकें और लोगों को आने-जाने की सुविधा हो।


इसी दौरान हमारे कोरिया जिले के ब्लॉकखण्ड के सामाजिक अध्यक्ष श्री प्रमोद कुमार पण्डों, सहायक सचिव सुश्री रामु कुमार पण्डों द्वारा चयनित खड़गवां ब्लॉक के ग्राम पंचायत बहालपुर में पण्डों जनजाति के सर्वेक्षण-परीक्षण बैठक रखा गया, और इस बैठक में अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा खड़गवां ब्लॉक के सभी गांवों के शिक्षित लड़का/लड़कियों को और बुजुर्ग पुरुष एवं महिलाओं को और उसी बीच हमारे पण्डों सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी आमंत्रित किया गया। रायपुर से आये अधिकारी श्री डी.पी.नागेश - उपायुक्त, श्री महेन्द्र पाल खाण्डेकर - सहायक संचालक, श्री जी.एल.बलेन्दर - अनुसंधान सहायक, श्री लक्ष्मी प्रसाद पटेल - सहायक संचालक और श्री भूषण सिंह नेताम - अनुसंधान सहायक उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इस बैठक में उपस्थित पण्डों आदिवासियों से उनकी सामाजिक-आर्थिक एवं परिस्थिति एवं खान-पान, विवाह संबंधित जानकारी लिए और पुछ-ताछ किये और वहीं शिक्षित लड़का, लड़कियों को फार्म भरने की परिशिक्षण भी दिये, उन्होंने एक फार्म भर कर भी दिखाऐ। उन्होंने ये कहा कि हर गांव में निवासरत अपने पण्डों जनजाति के लोगों कों अच्छे से पुछ-ताछ कर साफ़ शब्दों में सर्वे करें या फार्म भरें और उन्होंने ये भी कहा की हम लोग जितना जल्दी सर्वे करेंगे उतने जल्दी ही मंत्रालय में फार्म पहुंचेगी।

अधिकारियों द्वारा बताई जा रही है कि सरगुजा और सुरजपुर जिले के पण्डों जनजाति के लोगों की सर्वे हो चुका है और मंत्रालय को पाता है। और वहां के लोगों को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया है और उसकी लाभ भी मंत्रालय पण्डों आदिवासियों को दे रही है। मंत्रालय को कोरिया जिले में भी पण्डों आदिवासी जनजाति के लोग निवासरत हैं इसकी जानकारी नहीं थी, मंत्रालय को सिर्फ बैगा जनजाति का ही सूची के बारे पता है और वे अनुसूचित जनजाति में शामिल भी हैं तथा नौकरियों में सीधी भर्ती जैसी सुविधाओं का लाभ भी उठा रहे हैं।


बाद में पता चलने से मंत्रालय द्वारा अभी जाकर हम लोगों के सर्वे एवं रहन-सहन पहेनावा-ओढ़ावा और खान-पान साथ में सरगुजा एवं सुरजपुर के पण्डों आदिवासियों से विवाह संबंधित जानकारी के लिए अधिकारियों को भेजा गया है। इसीलिए हर ब्लॉक के एक गांव में बैठक रखा जा रहा है और सर्वे की जानकारी दी जा रही है।

खड़गवां ब्लॉक के बहालपुर में बैठक उपरांत साथ में खाना खाते लोग।

इस बैठक में हमारे खड़गवां ब्लॉक के सोस, गेलहापानी, कदरेवां, छोटे कलुआ एवं सैंदा, नागपानी, सीटीपात्थर ये सभी गांव के और हमारे पण्डों जनजाति के समाजिक कार्यकर्ता अधिक संख्या में उपस्थित रहे, साथ में खाने-पीने की भी व्यवस्था किया गया था।


नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।

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