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महिला स्व-सहायता समूह ने, क्यों लिया गांव की साफ-सफाई करने का जिम्मा

पंकज बांकिरा द्वारा सम्पादित


प्रत्येक ग्रामों में, महिला समितियों द्वारा विशेष कार्य किये जाते हैं। इन समितियों की भूमिका, गांवों में बहुत अहम होती है, वे अपने स्तर से बहुत सारे कार्य करते हैं। उन्हें सरकार-प्राशासन भी, बहुत सारे योजनाओं के माध्यम से जोड़ती हैं। जिससे, महिलाओं और गांव वालों को बहुत सारे लाभ मिलते हैं। ‘जय माँ कोसगाई महिला स्व-सहायता समूह’ ने, कोरोना काल के बाद, अपने गांव की फिर से सफाई करने की ठानी है। और महिला समिति के इस कार्य को, लोग खूब पसंद कर रहे हैं।

साफ सफाई करती महिलाएं

हसदेव नदी के किनारे, झोरा ग्राम स्तिथ है। इस नदी को देखने के लिए, भारी संख्या में पर्यटक आते हैं, साथ ही पिकनिक के लिए भी, लोग इसे अच्छी जगह मानते हैं। और पूरे साल भर तक पिकनिक मनाने वालों की भीड़ लगी रहती है। जिससे, इस जगह पर गंदगी या कचड़ा होना आम बात है। जिसकी साफ-सफाई होना बहुत ज्यादा जरूरी है। और इस स्थान की साफ़-सफाई के लिए, शासन से किसी भी तरह की सुविधा नही दी गयी है। इसलिए गांव के ही महिलाओं ने, जो ‘जय माँ कोसगाई महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़ी हैं। उन्होंने यह निर्णय लिया कि, यह हमारा अपना गांव है, जिसकी साफ-सफाई गांव के लोगों को ही करना है। इसलिए, स्व-सहायता समूह के माध्यम से, इस जगह की सफाई करेंगे और पिकनिक आने वाले लोगों से कुछ पैसे लेंगे। इसके लिए, उन्होंने एसडीएम और थाना प्रभारी को अनुमति के लिए आवेदन दिया, जिसे प्रशासन ने, इस कार्य के लिए समूह को अनुमति प्रदान की।

पर्यटक, विशेष दिनों पर, ऐसे आनंद लेते हैं

इस समूह की सभी महिलाएं, प्रत्येक सुबह, पिकनिक स्थल की साफ-सफाई करने जाती हैं। फिर आने के बाद, नाका लगा कर, पिकनिक आने वाले लोगों से कुछ पैसे लेते हैं। कोरोना काल के बाद, इस समूह ने साफ़-सफाई के काम को छोड़ दिया था। उस समय सभी डरे हुए थे। क्योंकि, इस वायरस के चपेट में, लाखों-करोड़ लोग आये थे। उसके बाद, इस समूह के लोग ध्यान नहीं दे रहे थे। लेकिन, इस साल जैसे ही ठंड का समय आया। तो, यह समूह, अपने इस कार्य को जारी रखने के लिए, दोबारा तैयार हुई। ये महिला समिति, साफ-सफाई के साथ-साथ पिकनिक स्थल में पर्यटकों के लड़ाई-झगड़े को भी शांत करने का काम करती हैं। अक्सर यहाँ, कुछ पर्यटकों द्वारा कांच की बोतलें भी तोड़ दी जाती हैं। जो सफाई करने वालों के साथ-साथ अन्य पर्यटकों के लिए मुसीबत खड़ी कर देती है। यदि, टूटे कांच किसी के पैरो में गढ़ जाये, तो लंबे समय तक घाव रह जाता है। यहाँ कचड़ा इकट्ठा करने के लिए, कूड़ा दान भी बनाया गया है। लेकिन, कुछ लोग शराब पीने के बाद, कांच की बोतलें, बाहर में ही फोड़ देते हैं। जो सभी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

कचरा रखने हेतु, बनाया गया कूड़ादान

जय माँ कोसगाई महिला स्व-सहायता समूह में, कुल ग्यारह महिलाएं हैं। परन्तु, साफ-सफाई के लिए इस समूह में तीस से ज्यादा महिलाएं काम करती हैं। ये समूह, पहले दोना-पत्तल और अगरबत्ती बनाने का काम भी करती थीं। चूँकि, इस समूह का, दस साल पहले ही पंजीकरण कराया जा चूका है।


ग्राम झोरा के, कार्तिक राम का कहना है कि, “पूर्व में, जब यहाँ घाट नही बना था। तो, लोग ज्यादा नही आते थे। लेकिन एनटीपीसी ने, यहाँ पचरी घाट बना दिया और यहाँ तक पक्की सड़क बन गयी। जिससे, लोग, यहाँ पिकनिक मनाने के साथ-साथ घूमने भी आने लगे और यहाँ नदी के सुंदर दृश्य का आनंद लेते हैं। सर्दी के मौसम में, यहाँ सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं। अब तो पिकनिक मनाने वालों के लिए, चबूतरे भी बना दिये गए हैं। जिससे, पिकनिक मनाने में किसी को भी दिक्कत ना हो और साथ ही हैंडपंप की भी सुविधा कर दी गयी है। पहले यहाँ लोग पिकनिक मनाने नहीं आते थे। तो, कचरा भी नही होता था। लेकिन, अब पिकनिक स्थल बनने के बाद, पिकनिक मनाने वाले लोग कचरा कर दिया करते हैं। जिससे, ये जगह बहुत ज्यादा गंदी हो जाती है। गाँव के गाय-बैल भी, यहाँ फेंके गए कागज और पन्नियों को खाकर मर जाते हैं। जिससे, गांव वालों के लिए, इस स्थल की साफ-सफाई अति आवश्यक हो गयी है। और इसलिए ही पिकनिक मनाने वालों से साफ़ सफाई के पैसे लिए जाते हैं।”

खाना बनाने और बैठने के लिए बनाया गया चबूतरा

महिला समितियों द्वारा, गांव में बहुत से कार्य किये जा सकते हैं। महिलाएं, इस तरह की समूह बनाकर, अपने और गांव के लिए, कुछ अच्छा कर सकती हैं। क्योंकि, उन्हें अपने लिए, रोजगार के साधन मिल जाते हैं। प्रत्येक गांवों में, इस तरह की समिति का गठन अवश्य कर देना चाहिए। जिससे, शासकीय योजनाओं का लाभ, अधिक लोगों को मिल सके।


नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।


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