top of page

क्या आप पुटू की फसल से परिचित हैं?

पंकज बांकिरा द्वारा सम्पादित


पुटू एक खरीफ फसल है, यह आमतौर पर जून-अक्टूबर के महीनों में ही बोई जाती है। जिसका उत्पादन कम मात्रा में किया जाता है। कई बार खेतों में दो-चार पुटू के पौधे उग जाते हैं तो लोग उसे ‘वन कचड़ा’ समझ कर अपने खेतों से उखाड़ फेंकते हैं। लेकिन, इसकी भी खेती की जाती है। इसका फल हल्का सा भिंडी की तरह रहता है। लेकिन, यह छोटा और गुलाबी रंग का होता है। नवम्बर से फरवरी तक पुटू का उपयोग गुड़ फैक्ट्रियों में किया जाता है।

पुटू की फसल

तस्वीर में आप देख सकते हैं कि, पुटू के पौधे पतले और लम्बे होते हैं। इसमें बाकी फसलों की तुलना में पत्ते कम रहते हैं। इसकी खेती ज्यादातर गुड फैक्ट्री के निकट के किसान ही करते हैं। क्योंकि, इसे कोई लेने वाला नहीं रहता और इसकी मांग भी उतनी नहीं रहती। इसका मुख्य रूप से इस्तेमाल गुड फैक्ट्री में ही होता है और अन्य जगह इसे कचड़ा समझा जाता है। इसकी खेती एक-डेढ़ एकड़ से अधिक में नहीं करते हैं। क्योंकि, इसका इस्तेमाल कम कम मात्रा में होता है। इस वजह से पुटु की कटाई थोड़ी-थोड़ी मात्रा में की जाती है।

पुटू का रस

उप्पर तस्वीर में आप देख सकते हैं कि, पुटू के पौधे को तोड़कर एक ड्रम में रखा गया है और उसके बाद उस ड्रम में बहुत सारा पानी डालने पर, पूरा पानी एक चिपचिपे पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है। फिर यह उपयोग करने लायक हो जाता है। पुटू का पौधा, बीज के मुक़ाबले ज्यादा उपयोगी रहता है। जबकि, बाकी फसलो में बीज सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है।

गुड़ फैक्ट्री में गुड बनाने की प्रक्रिया

इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि, जमीन के बराबर चार कढ़ाई गड़े हुए हैं और उनमें गन्ने के रस को उबाला जा रहा है। तीन कढ़ाई गन्ने के रस को फ्रेश करने का कार्य करते हैं और आखिरी कढ़ाई में गुड़ बनता है। कढ़ाई के ऊपर जो काला सा परत दिख रहा है, वह मरी है जो ऊपर आ रहा है। पुटू के रस को उसी कढ़ाई में चार लीटर डाल कर उबलने से गन्ने का रस फ्रेश रहता है।


ग्राम बीजाझोरी के रहने वाले आयुष साहू का कहना है कि, "पुटू एक कचड़ा है, जिस कारण किसान लोग उसकी खेती नहीं करते हैं। क्योंकि, ना ही उसका मार्केट में मांग रहता है और ना ही पुटू ज्यादातर काम आता है। इसलिए, पुटू को कचरा मानते हैं।" रामलखान धुर्वे का मानना है कि, "कोई भी फसल बेकार नहीं होता। क्योंकि, सब का एक अलग इस्तेमाल और अलग-अलग जरूरत होता है। पुटू की फसल का गुड फैक्ट्री में कच्चा माल की तरह उपयोग होता है।"


नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।

Comments


bottom of page