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जानें गन्ने के वेस्ट पदार्थ से कम्पोस्ट खाद कैसे प्राप्त होता है

पंकज बांकिरा द्वारा सम्पादित


पेड़-पौधे और फसल को पोषण देने के लिए खाद सबसे जरूरी रहता है। क्योंकि, खाद्य से ही पौधों को पोषण तत्व प्राप्त होता है और वह बढ़ना शुरू करता है साथ ही फलने-फूलने लगता है। और खाद्य से भूमि की ऊर्जा शक्ति भी बढ़ती है, जिससे कोई भी फसल अच्छी मात्रा में पैदावार देती है।


खाद चार प्रकार के होते हैं।

1. गोबर खाद

2. कम्पोस्ट खाद

3. हरी खाद

4. रासायनिक खाद


गन्ने से शक्कर बनाने या गुड बनाने के लिए, गन्ने को मशिन में डालकर उसका रस निकाला जाता है। फिर रस को उबाला जाता है, रस उबालने से जो रस में अपशिष्ट पदार्थ रहता है, वह बाहर निकल जाता है। उसके बाद उसको गड्ढे या डिब्बे में रखा जाता है और डिब्बा भर जाने के बाद, उसको एक गड्ढे में फेंक दिया जाता है। गन्ने का रस मशीनों के माध्यम से निकाला जाता है। जिससे रस अलग हो जाता है और उसका छिलका भी अलग हो जाता है। फिर उस रस को गुड और शक्कर बनाने में उपयोग किया जाता है।

गन्ने के रस से निकल रहा अपशिष्ट पदार्थ

तस्वीर में आप देख सकते हैं कि, गन्ने के रस को गुड बनाने के लिए उबाला जा रहा है। जिससे काला सा अपशिष्ट पदार्थ निकल रहा है और उसको छननी के मदद से निकाला जा रहा है। और जाली के छोटे-छोटे टुकड़ों में डालकर रखा जा रहा है, ताकि उससे गन्ने का रस अच्छे से निकल जाए। रस निकालने के बाद, उसको एक गड्ढे में फेंक दिया जाता है और वह पदार्थ करीबन एक साल तक पड़ा रहता है और ठंडे होने के बाद मिट्टी के जैसे बन जाता है। और वह बदबू करने लगता है, जो देखने में एक दलदल की तरह दिखाई देता है। जिसे स्थानीय लोग ‘गन्ने के मारी’ के नाम से जानते हैं और उसका उपयोग भी करते हैं।

गन्ने से निकला कम्पोस्ट खाद

उप्पर तस्वीर में आप देख सकते हैं कि, एक गढ्ढा कीचड़ सा दिखाई दे रहा है, जो गन्ने से निर्मित कंपोस्ट खाद है। इसका उपयोग इस गड्ढे के सूख जाने के बाद किया जाएगा। यह खाद लोगों को ₹6000 रुपए प्रति ट्रैक्टर के हिसाब से किसान लोगों को बेचा जाता है। इस खाद को किसान लोग अपने खाली खेत में भी डालते हैं और फसलों के जोड़ों में भी डालते हैं। जिससे पौधों में हरियाली आती है और पौधा घना होता है और मिट्टी के उर्वरक शक्ति को बढ़ाता है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होता है।


गांव के किसान कंपोस्ट खाद को खरीदने के लिए इंतजार करते रहते हैं कि, कब खाद बिकना शुरू हो, इस राह में रहते हैं। क्योंकि, यह खाद किसानों को अच्छी मूल्य में मिल जाता है और उसका रिजल्ट जो है, अच्छा रहता है। जिससे किसान भलीभांति परिचित रहते हैं, इसलिए दो से तीन ट्रैक्टर खाद लेते हैं। और फसल में डालने के लिए, पहले से लेकर रखते हैं।

गन्ने का बगाश (भूसा)

गन्ने को पेरने से, उसका रस और भूसा अलग हो जाता है। फिर उसी भूसे को एक से डेढ़ साल रखने पर, वह सड़ जाता है। और सड़ने के बाद खाद के रूप में उपयोग होता है। जिसे, किसान अपने खेत की उर्वरता को बढ़ाने के लिए उपयोग करते हैं। और यह कम्पोस्ट खाद, मिट्टी में मृदा उत्पादन करता है, जिससे फसल पहले के तुलना में अधिक होता है।


ग्राम बीजाझोरी के निवासी तुलाराम साहू, जो की एक किसान हैं। उनका अपना अनुभव है कि, वह अपने खेतों की उर्वरक शक्ति को बढ़ाने के लिए कंपोस्ट खाद का उपयोग करते हैं। और उन्हें 1 एकड़ के लिए दो ट्रैक्टर कंपोस्ट खाद की जरूरत रहता है। इस खाद को एक बार डालने से, खेतों में दो-तीन साल तक अच्छी फसल होती है। इस कारण उनको जैसे ही लगता है कि, खेतों में उर्वरता कम हो गयी है, तो 10-12 ट्रैक्टर कंपोस्ट खाद खरीद के ले आते हैं और मजदूरों की मदद से खेतों में पूरा एक परत के जैसे डालते हैं। खेती में अच्छी फसल लगने के लिए कंपोस्ट खाद ही अच्छा रहता है। क्योंकि, कंपोस्ट खाद फसल और मिट्टी को कोई नुकसान नहीं करता है। गोबर खाद और कंपोस्ट खाद मिट्टी की उम्र बढ़ाते हैं। ज्यादा पैदावार की लालच में, लोगों को रासायनिक खादों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। चूँकि, उससे मिट्टी की उर्वरता कम होती है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।


नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।

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