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आइये जानें सब्जियों में लगने वाले कीटों का नाश करने वाले, आयुर्वेदिक जैविक कीटनाशक दवाई के बारे में

पंकज बांकिरा द्वारा सम्पादित


जैसे कि आप सभी जानते हैं कि, सब्जी लगाना तो आसान है। परंतु, सब्जियों को कीटों से बचाना लोगों के लिए बहुत कठिन है। क्योंकि, गांव के लोग फसलों को कीटों से बचाने के लिए रासायनिक कीटनाशक दवाइयों का उपयोग करते हैं। जिससे उनको नुकसान होने की संभावना रहता है और उसका बाजारी मूल्य भी काफी अधिक होता है। बहुत से गरीब किसान भाई इसे खरीद भी नहीं पाते और कई बार अपनी सब्जी की सुरक्षा नही कर पाते, जिससे उनकी सारी फसल चौपट हो जाती है और उनको भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। इसलिए, उनकी इस समस्या को देखते हुए, हम आपको एक ऐसी आयुर्वेदिक कीटनाशक दवाई के बारे में बताएंगे। जिसे आप अपने घर में, अपने हाथों से बनाकर उपयोग कर सकते हैं। इस औषधि से आपको किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा और इस घरेलू नुस्खे का उपयोग कर अपनी पैसों की बचत कर सकते हैं और अच्छी सब्जी उत्पादन कर पाएंगे।

कीट लगने से बर्बाद होती फसल

आज हम आपको सिरकी कला की स्व-सहायता समूह की एक सदस्य दिलेश्वरी बाई, जो कृषि सखी में पदस्थ हैं, से मिलाते हैं। जिनकी उम्र लगभग 29 से 30 साल होगी। वह कई फसलों तथा कीटनाशक दवाइयों की पूर्ण जानकारी रखती है। आइये उनसे जानते हैं कि, सब्जी के पौधों में लगने वाली कीटों से छुटकारा कैसे पाएं और उनके लिए औषधि कैसे बनाएं। बातचीत के दौरान, उन्होंने हमें बताया कि, इस कीटनाशक दवाई को बनाने के लिए सुबह का समय बहुत ही अच्छा रहता है। हमें एक लीटर जैविक कीटनाशक दवाई बनाने के लिये अच्छे क्वालिटी का 50 ग्राम लहसुन लेना होगा और इसके साथ 100 ग्राम हरि तिखी मिर्ची। इसके बाद 100 ग्राम गौ-मूत्र हो तो अच्छी बात है। यदि न हो तो 100 ग्राम लस्सी या छाछ ले सकते हैं। बस ये तीन चीजें होना बहुत जरूरी है। इनमें से एक के भी नही होने पर औषधि नहीं बनेगी।

लहसुन और तीखी मिर्च

इस जैविक कीटनाशक को बनाने के लिए, सबसे पहले लहसुन और हरी मिर्च को मिक्सी या खलबट्टा में डाल कर, अच्छे से पीस लें। इसे पीसने के बाद, हमें एक बर्तन लेना है। जो प्लास्टिक या मिट्टी का हो, हमें धातु वाली बर्तन का उपयोग नही करना है। फिर उस बर्तन में एक लीटर पानी डाल लेना है। अगर गौ-मूत्र होगा तो 100 ml मिलाएंगे, अगर नहीं है तो 100 ml लस्सी या छाछ मिक्स कर देंगे। अब हमें लहसुन और हरी मिर्च से बनी पेस्ट को पानी या लस्सी वाले बर्तन में डाल देंगे और अच्छे से मिक्स कर देंगे।


फिर इस जैविक कीटनाशक दवाई का उपयोग खाने वाले फूल, सब्जी, फलदार पौधों आदि पर छिड़काव कर, कर सकते हैं। यह औषधी, बीमारी को पूरे जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है। इसलिए और फिर कभी दोबारा कीट लगने की संभावना बहुत कम होता है। अब इसे दो दिन के लिए छोड़ देते हैं और बीच-बीच में हिलाते रहेंगे, दो दिन बाद हमारा कीटनाशक बनकर तैयार हो जाता है। उसके बाद इसे अच्छे से छान लेना है।

खलबट्टा में पीसने के लिए रखी सामग्री

अब 100 ml कीटनाशक दवाई, एक लीटर पानी में मिक्स कर सकते हैं और जिन पौधों में तने छेदक, फल छेदक या फूल में कीट लगे होते हैं। उसमें इसका प्रयोग, सप्ताह में दो बार उपयोग करें। ताकि, आपका फसल एकदम सुरक्षित रहे और अच्छे से उपज भी हो। यह किटनाशक दवाई, हमारे लिए भी लाभदायक है। इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचेगा और पर्यावरण के लिये भी लाभदायक है। चूंकि, इससे पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता। इसमें हवा को जहरीली बनाने का गुण नहीं होता। इस कारण, यह एकदम सस्ती और सुरक्षित कीटनाशक दवाई है। और अब आपको महंगी-महंगी कीटनाशक दवाई, बाजार से खरीदने की जरूरत नही पड़ेगा।


रासायनिक कीटनाशक दवाई, घरेलू आयुर्वेदिक दवाई के अपेक्षा काफी महंगी होती है। जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। रासायनिक कीटनाशक दवाई के गलत तरीके से इस्तेमाल करने से जान भी जा सकती है। यह बहुत ही जहरीली होती है और इसका छिड़काव करने के लिए कई सावधानीयाँ भी बरतनी पड़ती है। यह रसायनिक दवाई, हवा में मिलकर हमारे स्वास्थ्य को खराब कर देती है। इन रासायनिक दवाई से कई छोटे वन्य जीव मारे जाते हैं। इस प्रकार यह दवाई पर्यावरण के लिए भी काफी हानिकारक है।


अतः मेरा सभी आदिवासी भाइयों से निवेदन है कि, दिलेश्वरी बाई द्वारा बताए गए जैविक कीटनाशक दवाई का उपयोग, एक बार अपने हाथों से बनाकर जरूर करें। ताकि, आप अपने कीट के समस्या और आर्थिक समस्या से निजात पा सकें। क्योंकि, इस कीटनाशक का निर्माण घरेलू चीजों से होता है। जो हमें बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। इसके निर्माण में भी ज्यादा खर्च करने की जरूरत नही पड़ती। अगर यह औषधी अच्छे से कारगर हो, तो अपने आस-पास के लोगों को जरूर बताएं। ताकि, वे भी इस औषधि का लाभ ले सकें और उनकी भी समस्या दूर हो सके।


नोट: यह लेख Adivasi Awaaz प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें ‘प्रयोग समाजसेवी संस्था’ और ‘Misereor’ का सहयोग है।

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